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India-Pak Ceasefire का क्रेडिट न मिलने से ‘ठगा’ हुआ महसूस कर रहे थे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प, इसीलिए लगाया टैरिफ?

Trade Tensions Between US India: अमेरिकी एक्सपर्ट एश्ले टेलिस ने दावा किया कि ट्रम्प भारत-पाक सीजफायर का क्रेडिट न मिलने से ठगा महसूस कर रहे थे, इसलिए भारत पर टैरिफ लगाया. राजनीति भी इसकी एक वजह है.

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डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को फिर दी धमकी

Vijay Ram Edited by Vijay Ram

Donald Trump Tariffs On India: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भारत-पाकिस्तान सीजफायर का क्रेडिट न मिलने से खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे थे, जिसकी वजह से उन्होंने भारत पर टैरिफ लगाने का फैसला किया. यह दावा अमेरिकी रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ एश्ले टेलिस ने NDTV को दिए एक इंटरव्यू में किया. टेलिस ने कहा कि टैरिफ सिर्फ रूसी तेल खरीदने की वजह से नहीं लगाया गया, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक कारण भी हैं. मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष विराम में ट्रम्प शांति का श्रेय चाहते थे, लेकिन भारत ने किसी तीसरे पक्ष की दखलंदाजी से इनकार कर दिया. इससे अमेरिका-भारत संबंधों में तनाव बढ़ा.

राजनीति और व्यापार असंतुलन

टेलिस ने ट्रम्प के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो पर आरोप लगाया कि उन्होंने इस तनाव को और बढ़ाया. नवारो ने भारत को ‘टैरिफ का महाराज’ कहा और रूसी तेल से मुनाफाखोरी का आरोप लगाया, जिससे दोनों देशों के रिश्ते खराब हुए. इससे भारत का झुकाव अमेरिका के दुश्मन देशों जैसे रूस और चीन की ओर बढ़ा है.

वहीं, ट्रम्प ने कहा कि भारत पर 50% टैरिफ इसलिए लगाया गया क्योंकि दोनों देशों के बीच लंबे समय से ‘एकतरफा रिश्ता’ रहा है. ट्रम्प के मुताबिक, भारत अमेरिकी सामानों पर 100% टैरिफ लगाता है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है. इससे अमेरिका-भारत व्यापार में असंतुलन पैदा हो गया. उन्होंने जुलाई में 25% टैरिफ की घोषणा की थी, जिसे अब बढ़ाया गया है.

वैश्विक प्रभाव और भारत की स्थिति

टेलिस ने इंटरव्यू में कहा कि ट्रम्प की टैरिफ नीति से भारत कोलेटरल डैमेज की तरह प्रभावित हो रहा है, लेकिन ट्रम्प को इसकी परवाह नहीं. यह नीति अमेरिका के व्यापार घाटे को सुधारने पर केंद्रित है, लेकिन इससे भारत जैसे सहयोगी देशों के साथ संबंध बिगड़ रहे हैं. पूर्व राजनयिक विकाश स्वरूप ने भी ट्रम्प की भारत को नजरअंदाज करने की आलोचना की. विशेषज्ञों का मानना है कि यह तनाव भारत को रूस-चीन के गठबंधन की ओर धकेल सकता है, जो वैश्विक राजनीति में नया मोड़ ला सकता है. भारत सरकार ने अभी तक इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन व्यापारिक हलकों में चिंता है.

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