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प्लेन गिर रहा था, फिर प्लंबर ने संभाला कंट्रोल; क्या मोसाद का एजेंट था यानिव हायून? फिल्मी कहानी ने खड़े किए बड़े सवाल

Dubai Tel Aviv Flight: प्लंबर यानिव हायून को लेकर सोशल मीडिया पर एक अलग ही दावा वायरल हो गया. कुछ पोस्ट में कहा गया कि साधारण प्लंबर के रूप में पहचाने जा रहे हायून वास्तव में इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद के एजेंट हैं और ‘प्लंबर’ उनका कोडनेम है.

Was Yaniv Hayun a Mossad agent?

क्या मोसाद का एजेंट था यानिव हायून?

Dubai Tel Aviv Flight: दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में हुए हमले के बाद भारतीय पायलट स्मित माछर और इजराइली नागरिक प्लंबर यानिव हायून की बहादुरी चर्चा में है. एक तरफ घायल होने के बावजूद कैप्टन माछर ने कॉकपिट का लॉक खोलकर यात्रियों और क्रू को अंदर आने का रास्ता दिया, वहीं दूसरी ओर यात्री के रूप में मौजूद इजराइली प्लंबर हायून ने हमलावर को काबू करने और विमान को संभालने में अहम भूमिका निभाई.

प्लंबर की कहानी ने सोशल मीडिया पर खड़ा किया सवाल

प्लंबर यानिव हायून को लेकर सोशल मीडिया पर एक अलग ही दावा वायरल हो गया. कुछ पोस्ट में कहा गया कि साधारण प्लंबर के रूप में पहचाने जा रहे हायून वास्तव में इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद के एजेंट हैं और ‘प्लंबर’ उनका कोडनेम है. हालांकि इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्टों में उन्हें किसी खुफिया एजेंसी के एजेंट के रूप में पेश नहीं किया गया है. उन्हें एक ऐसे नागरिक के तौर पर बताया गया है, जिसने मुश्किल घड़ी में साहस दिखाया.

फिल्मों से विमान संभालना सीखा

जब प्रधानमंत्री नेतन्याहू और अन्य लोगों ने हायून से पूछा कि उन्हें विमान के नियंत्रण से जुड़ी जानकारी आखिर कहां से मिली, तो उनका जवाब भी काफी दिलचस्प था. उन्होंने बताया कि उन्हें विमान दुर्घटनाओं पर आधारित फिल्में देखना पसंद है और उन्हीं फिल्मों से उन्होंने कुछ चीजें समझीं. बिना औपचारिक ट्रेनिंग के एक आम प्लंबर द्वारा विमान संभालने की यह बात लोगों को फिल्मी कहानी जैसी लगी और इसी वजह से इंटरनेट पर मोसाद वाले दावे ने जोर पकड़ा.

ट्रंप ने भी कहानी पर फिल्म बनाने की बात कही

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी हायून की कहानी पर मजाकिया अंदाज में प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि हॉलीवुड को प्लंबर के हीरो बनने की इस पूरी घटना पर फिल्म बनानी चाहिए. वहीं नेतन्याहू और अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने उनकी बहादुरी को एक आम नागरिक के असाधारण साहस के तौर पर देखा है.

हमलावर को पकड़कर कॉकपिट से दूर किया

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हायून विमान के कर्मचारी या क्रू मेंबर नहीं थे. वह यात्री के तौर पर दुबई से तेल अवीव जा रहे थे. जब विमान में संकट पैदा हुआ तो वह कॉकपिट की तरफ पहुंचे. उन्होंने हमलावर को पकड़ लिया और उसकी गर्दन जकड़कर उसे काबू किया. इसके बाद उसे विमान के नियंत्रण से दूर खींच दिया गया. उस समय विमान का अगला हिस्सा नीचे की ओर झुक रहा था और विमान तेजी से नीचे जा रहा था.

कंट्रोल पीछे खींचते ही ऊपर उठने लगा विमान

हमलावर को काबू करने के बाद हायून फिर कॉकपिट में पहुंचे. उन्होंने विमान का कंट्रोल अपने हाथ में लिया और उसे पीछे की तरफ खींचा. इसके बाद विमान नीचे जाने के बजाय ऊपर की ओर उठने लगा. कुछ देर बाद विमान में यात्री के तौर पर मौजूद एक अन्य पायलट ने नियंत्रण संभाल लिया.

नेतन्याहू ने बताया कुल्हाड़ी से हुआ हमला

इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस घटना को लेकर एक अहम दावा किया है. उनके मुताबिक फ्लाईदुबई के विमान में हमले के लिए चाकू का इस्तेमाल नहीं हुआ था. उनका कहना है कि कॉकपिट में रखी ‘क्रैश Axe’ यानी इमरजेंसी कुल्हाड़ी से हमला किया गया. नेतन्याहू के अनुसार को-पायलट ने इसी कुल्हाड़ी से हमला करने के बाद विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने की कोशिश की.

जांच में सामने आया कॉकपिट में मौजूद था फायर एक्स

जांच से सामने आया कि हमले में किसी बाहरी हथियार को विमान के अंदर लाने की बात सामने नहीं आई. इस्तेमाल किया गया हथियार कॉकपिट में पहले से मौजूद फायर एक्स यानी क्रैश एक्से था. विमानन नियमों के तहत ऐसी इमरजेंसी कुल्हाड़ी विमान में रखना जरूरी होता है और इसे विमान के निर्माण के समय ही लगाया जाता है. यानी यह कोई वैकल्पिक उपकरण नहीं, बल्कि विमानन नियमों के तहत जरूरी सुरक्षा उपकरण है.

आखिर क्या होता है क्रैश Axe?

‘क्रैश Axe’ मूल रूप से आपात स्थिति में इस्तेमाल होने वाला एक विशेष उपकरण है, जो देखने में सामान्य कुल्हाड़ी जैसा होता है. यह कॉकपिट में रखा जाता है और बचाव कार्य में काम आता है. जरूरत पड़ने पर इससे दरवाजा तोड़ने के साथ आग बुझाने जैसे काम भी किए जा सकते हैं. प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने सीबीएस न्यूज को दिए इंटरव्यू में भी इसी उपकरण का जिक्र किया था.

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घायल होने के बाद भी डटे रहे कैप्टन स्मित माछर

इस पूरे घटनाक्रम में भारतीय पायलट स्मित माछर की भूमिका भी बेहद अहम रही. हमले में घायल होने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी. कैप्टन माछर ने कॉकपिट का लॉक खोल दिया, जिससे यात्री और क्रू के सदस्य अंदर पहुंचकर मदद कर सके. उन्होंने को-पायलट के हमले का सामना किया और उससे मुकाबला किया. उनकी बहादुरी के कारण विमान में सवार 174 लोगों की जान बचाने में मदद मिली. यही वजह है कि कैप्टन माछर के साथ यानिव हायून की बहादुरी की भी दुनियाभर में चर्चा हो रही है.

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-भारत एक्सप्रेस



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