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फीफा वर्ल्ड कप 2026 से पहले ‘खून’ से लथपथ मैक्सिको: 2000 साल पुराने मून पिरामिड पर हमले ने उड़ाए होश, क्या सुरक्षित रहेंगे फैंस?

FIFA World Cup 2026 से पहले मैक्सिको में हुए हमले ने सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. Teotihuacan पिरामिड पर हमले में एक कनाडाई नागरिक की मौत और कई लोग घायल हुए हैं

Mexico Attack News: फीफा वर्ल्ड कप 2026 के आगाज में अब महज 60 दिनों का समय शेष है, लेकिन सह-मेजबान देश मैक्सिको से आई एक खौफनाक तस्वीर ने पूरी दुनिया के फुटबॉल प्रेमियों को डरा दिया है. दरअसल सोमवार को मैक्सिको के ऐतिहासिक टियोतिहुआकान (Teotihuacan) पिरामिड पर एक हमलावर ने जिस तरह पर्यटकों को निशाना बनाया, उसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा इंतजामों की पोल खोल दी है. हमले में 1 कनाडाई पर्यटक की मौत और 13 अन्य के घायल होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या वर्ल्ड कप के दौरान सुरक्षा (FIFA World Cup 2026 Security) की गारंटी दी जा सकती है?

वर्ल्ड कप की सुरक्षा पर उठा ‘बड़ा’ सवाल

बता दें कि 2026 का फुटबॉल वर्ल्ड कप इतिहास का सबसे बड़ा टूर्नामेंट होने जा रहा है, जिसकी मेजबानी मैक्सिको, अमेरिका और कनाडा मिलकर कर रहे हैं. इसमें से मैक्सिको के तीन बड़े शहरों मैक्सिको सिटी, गुआडालाजारा और मोंटेरे में कुल 13 मैच होने हैं.

वहीं सोमवार की घटना मैक्सिको सिटी से महज 50 किलोमीटर दूर हुई. कनाडाई विदेश मंत्री अनीता आनंद और मैक्सिकन राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाउम के बयानों में वह चिंता साफ दिखी, जो आने वाले समय में 55 लाख से ज्यादा फुटबॉल फैंस की सुरक्षा से जुड़ी है.

फरवरी से जारी है हिंसा का दौर(FIFA World Cup 2026 Security)

बताते चलें कि यह हमला (Teotihuacan Pyramid Shooting) मैक्सिको की कोई इकलौती घटना नहीं है. दरअसल फरवरी 2026 में कुख्यात कार्टेल सरगना ‘एल मेंचो’ (El Mencho) के मारे जाने के बाद से ही मैक्सिको के कई शहर ‘क्वासी-वार’ (अर्ध-युद्ध) की स्थिति में हैं. गुआडालाजारा जैसे शहर, जहाँ वर्ल्ड कप के अहम मैच होने हैं, वहां पहले से ही कार्टेल हिंसा के चलते तनाव है. अब पिरामिड जैसी हाई-प्रोफाइल जगह पर हुई इस गोलीबारी ने ‘लोन-एक्टर’ (अकेले हमलावर) के खतरे को भी बढ़ा दिया है, जिसे रोकना सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है.

फीफा और मैक्सिको सरकार के दावों पर ‘प्रश्नचिह्न’

फीफा और मैक्सिको सरकार लगातार ‘सब कुछ सुरक्षित है’ का दावा कर रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है. मून पिरामिड पर हमलावर का खुलेआम गोली चलाना और फिर खुद को मार लेना यह दर्शाता है कि भीड़भाड़ वाली जगहों पर सुरक्षा घेरा कितना कमजोर हो सकता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि ऐतिहासिक स्मारकों पर सुरक्षा इतनी ढीली है, तो ‘फैन जोन्स’ और स्टेडियम के बाहर की सड़कों पर सुरक्षा बनाए रखना बेहद मुश्किल होगा.

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क्या शिफ्ट होंगे फीफा के वेन्यू?

इस हमले (Teotihuacan Pyramid Shooting) में कनाडाई नागरिक की मौत के बाद कूटनीतिक गलियारों में भी खलबली है. सूत्र बताते हैं कि फीफा की सुरक्षा टीम मैक्सिको में सुरक्षा प्रोटोकॉल की फिर से समीक्षा कर सकती है. दक्षिण कोरिया जैसे कई देशों ने पहले ही अपने खिलाड़ियों और फैंस की सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की है. अगर हिंसा की ये घटनाएं नहीं रुकीं, तो टूर्नामेंट के सफल आयोजन पर काले बादल मंडरा सकते हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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