Former Suriname President Chandrikapersad Santokhi death: सूरीनाम के पूर्व राष्ट्रपति और प्रोग्रेसिव रिफॉर्म पार्टी के कद्दावर नेता चंद्रिका प्रसाद संतोखी का सोमवार को 67 वर्ष की आयु में निधन हो गया. वर्तमान राष्ट्रपति जेनिफर सिमंस ने इस दुखद समाचार की पुष्टि की है. संतोखी, जिन्होंने 2020 से 2025 तक सूरीनाम के राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया, अपनी ईमानदारी और कानून-व्यवस्था के प्रति कड़े रुख के कारण ‘शेरिफ’ के नाम से लोकप्रिय थे. उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें एक ‘प्रिय मित्र’ बताया.
वहीं पीएम मोदी ने ‘एक्स’ पर साझा किए गए अपने संदेश में कहा कि संतोखी जी का जाना न केवल सूरीनाम बल्कि वैश्विक भारतीय समुदाय (ndian Diaspora) के लिए एक अपूरणीय क्षति है. उन्होंने संस्कृत में संतोखी द्वारा ली गई शपथ को याद करते हुए उनके भारतीय संस्कृति के प्रति अगाध प्रेम को नमन किया.
Deeply shocked and saddened by the sudden demise of my friend and the former President of Suriname, Mr. Chandrikapersad Santokhi Ji. This is not only an irreparable loss to Suriname but also to the global Indian diaspora.
I fondly recall my many meetings with him. His tireless… pic.twitter.com/2Yy7sppwDy
— Narendra Modi (@narendramodi) March 31, 2026
बिहार की मिट्टी से राष्ट्रपति भवन तक का सफर
बता दें कि चंद्रिका प्रसाद संतोखी की जड़ें भारत के बिहार राज्य से जुड़ी थीं. 19वीं सदी में उनके दादा-दादी एक बंधुआ मजदूर के रूप में बिहार से सूरीनाम पहुंचे थे. नौ भाई-बहनों में सबसे छोटे संतोखी ने एक साधारण परिवार में जन्म लिया, जहां उनके पिता बंदरगाह पर काम करते थे और माँ दुकान में सहायक थीं.
इस साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर सूरीनाम के सर्वोच्च पद तक पहुँचना उनके संघर्ष और योग्यता की कहानी है. 2020 में जब उन्होंने (Chandrikapersad Santokhi) राष्ट्रपति पद की शपथ ली, तो उन्होंने वेदों के मंत्रों और संस्कृत भाषा को चुना, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा. यह उनके पूर्वजों की भूमि और महान भारतीय संस्कृति के प्रति उनके सम्मान का सबसे बड़ा प्रतीक था.
भारत-सूरीनाम संबंधों के वास्तुकार
अपने कार्यकाल के दौरान संतोखी ने भारत और सूरीनाम के बीच संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया. उन्होंने ऊर्जा, व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्रों में भारत के साथ कई महत्वपूर्ण समझौते किए. सूरीनाम की 27 प्रतिशत आबादी भारतीय मूल की है, और संतोखी उनके सबसे बड़े प्रतिनिधि बनकर उभरे. उन्हें भारत सरकार द्वारा ‘प्रवासी भारतीय सम्मान’ से नवाजा गया था और वे प्रवासी भारतीय दिवस के मुख्य अतिथि भी रहे. प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मन की बात’ में भी उनके व्यक्तित्व का उल्लेख किया था, जिससे भारत के आम जनमानस में उनके प्रति एक विशेष आदर भाव पैदा हुआ.
विश्व मंच पर क्षति और अंतिम विदाई
संतोखी के निधन से सूरीनाम में शोक की लहर है. एक पुलिस अधिकारी के रूप में करियर शुरू करने वाले संतोखी ने न्यायिक मंत्री और फिर राष्ट्रपति के रूप में देश की सेवा की. उनकी मौत का कारण अभी स्पष्ट नहीं किया गया है, लेकिन उनके जाने से मध्य और दक्षिण अमेरिका में भारतीय प्रवासियों का एक मजबूत स्तंभ ढह गया है.
पीएम मोदी ने उनके परिवार और सूरीनाम की जनता के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए उनके साथ बिताए पलों की तस्वीरें भी साझा कीं. संतोखी (Chandrikapersad Santokhi) का जीवन इस बात का प्रमाण है कि भले ही भौगोलिक दूरियाँ कितनी भी हों, संस्कृति और जड़ों का जुड़ाव सात समंदर पार भी अटूट रहता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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