फ्रांस ने ईरान से जुड़ी बातचीत और होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के मुद्दे पर मिस्र, कतर, UAE और सऊदी अरब को आमंत्रित किया है. इस बैठक में भारत और अमेरिका भी शामिल होंगे. फ्रांस का मानना है कि भारत पर पूरा भरोसा किया जा सकता है, इसलिए हर अहम मंच पर भारत को साथ रखा जाता है.
एवियन-लेस-बेन्स में होगा सम्मेलन
15 से 17 जून तक फ्रांस के शहर एवियन-लेस-बेन्स में यह समिट आयोजित होगा. जिनेवा झील के किनारे होने वाले इस सम्मेलन में दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के नेता जुटेंगे. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत कई उच्चस्तरीय प्रतिनिधि इसमें भाग लेंगे.
भारत-फ्रांस संबंधों की मजबूती
भारत और फ्रांस के बीच कई अहम कार्यक्रमों की शुरुआत हो चुकी है. 2026 को दोनों देशों ने इनोवेशन ईयर घोषित किया है. 2030 तक 30,000 भारतीय छात्रों को फ्रांस में दाखिला और वीजा मिलेगा. फ्रांस ने भारत को G7 बैठकों में विशेष महत्व दिया है. आमतौर पर आमंत्रित देशों को अंतिम दिन बुलाया जाता है, लेकिन भारत को हर सत्र में शामिल किया जा रहा है.
पीएम मोदी की भागीदारी
पीएम मोदी सोशल मीडिया की न्यूनतम आयु पर होने वाले सेशन में हिस्सा लेंगे. इसके अलावा वह माइक्रो इकोनॉमिक असंतुलन पर भी चर्चा करेंगे. पहली बार हेल्थ को G7 एजेंडा में शामिल किया गया है. सुरक्षा से जुड़े मुद्दों में वित्तीय अपराध और अवैध प्रवासन पर भी बातचीत होगी.
वैश्विक मुद्दों पर भारत की भूमिका
मिडिल ईस्ट, रूस-यूक्रेन विवाद और अन्य अंतरराष्ट्रीय मामलों पर भारत सक्रिय रूप से भाग लेगा. 14 मई को पीएम मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच द्विपक्षीय बैठक होगी. दोनों लंच पर भी साथ बैठेंगे. पीएम मोदी पेरिस में टेक्नोलॉजी कॉन्फ्रेंस में भी हिस्सा लेंगे.
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दो देशों का दौरा
पीएम मोदी का यह दौरा फ्रांस और स्लोवाकिया तक फैला है. नीस में वह राष्ट्रपति मैक्रों से मुलाकात करेंगे और फिर स्लोवाकिया जाकर प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको से मिलेंगे.
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-भारत एक्सप्रेस
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