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भारत-UK ऐतिहासिक व्यापार समझौता होगा लागू, जानिए क्या-क्या होगा सस्ता और किसे मिलेगा फायदा?

भारत-यूके व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (सीईटीए) बुधवार से प्रभावी हो जाएगा. इससे एक तरफ देश के घरेलू निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, दूसरी तरफ भारतीय सामानों को यूके का बाजार मिलेगा.

भारत और ब्रिटेन के बीच हुआ व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता यानी सीईटीए (CETA) बुधवार से लागू हो रहा है. इस समझौते को दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है. इसके लागू होने के बाद भारतीय उत्पादों के लिए ब्रिटेन का बाजार और ज्यादा खुल जाएगा, जिससे देश के निर्यातकों को फायदा मिलने की उम्मीद है.

इस समझौते का सबसे बड़ा असर उन भारतीय उद्योगों पर पड़ सकता है, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता है. कपड़ा, चमड़ा, जूते, समुद्री उत्पाद, रत्न और आभूषण, खिलौने और खेल के सामान जैसे क्षेत्रों को ब्रिटेन में अपने उत्पाद बेचने के लिए बेहतर अवसर मिलेंगे. इसके अलावा इंजीनियरिंग सामान, ऑटो पार्ट्स और ऑर्गेनिक केमिकल जैसे क्षेत्रों को भी इस नए व्यापार ढांचे से लाभ मिलने की संभावना है.

सीईटीए के तहत भारतीय निर्यातकों को करीब 99 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शून्य शुल्क की सुविधा मिलेगी. इसका मतलब है कि भारत से ब्रिटेन भेजे जाने वाले लगभग सभी प्रमुख सामानों पर आयात शुल्क कम या खत्म हो जाएगा. इससे भारतीय कंपनियों के लिए ब्रिटिश बाजार में प्रतिस्पर्धा करना आसान होगा और उनके उत्पादों की मांग बढ़ सकती है.

वहीं, ब्रिटेन से आने वाले कई सामानों पर भी भारत में आयात शुल्क धीरे-धीरे कम किया जाएगा. स्कॉच व्हिस्की, जिन, चॉकलेट, बिस्कुट और कॉस्मेटिक्स जैसे ब्रिटिश उत्पादों पर शुल्क में कटौती 15 जुलाई से शुरू होगी. हालांकि कुछ उत्पादों पर यह बदलाव चरणबद्ध तरीके से आने वाले वर्षों में लागू किया जाएगा.

ब्रिटिश स्कॉच व्हिस्की पर लगने वाला आयात शुल्क शुरुआत में 150 प्रतिशत से घटाकर 75 प्रतिशत किया जाएगा. इसके बाद अगले 10 वर्षों में इसे घटाकर 40 प्रतिशत तक लाने की योजना है. ब्रिटिश कारों पर भी शुल्क में कमी होगी, लेकिन यह कोटा आधारित व्यवस्था के तहत धीरे-धीरे लागू की जाएगी.

छोटे कारोबारियों और युवाओं के लिए नए अवसर

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस समझौते को भारत और ब्रिटेन के आर्थिक संबंधों के लिए अहम बताया है. उनका कहना है कि सीईटीए से दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा मिलेगा. उन्होंने भारतीय कंपनियों से ब्रिटिश कंपनियों के साथ नए साझेदारी के अवसर तलाशने और इस समझौते का फायदा उठाने की अपील की है.

मंत्री ने यह भी कहा था कि यह समझौता भारतीय किसानों, मछुआरों, कारीगरों और छोटे कारोबारियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बनाने में मदद करेगा. इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होने के साथ-साथ भारतीय उत्पादों की वैश्विक पहचान भी मजबूत हो सकती है.

खास तौर पर महिला उद्यमियों, युवाओं, स्टार्टअप्स और एमएसएमई क्षेत्र के लिए ब्रिटेन के प्रीमियम बाजार में प्रवेश के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है.

30 अध्यायों में शामिल हैं व्यापार से लेकर डिजिटल सेवाओं तक के नियम

सीईटीए पर 14 दौर की बातचीत के बाद 24 जुलाई 2025 को हस्ताक्षर किए गए थे. इस समझौते में कुल 30 अध्याय शामिल हैं, जिनमें वस्तुओं का व्यापार, सेवाएं, डिजिटल व्यापार, वित्तीय सेवाएं, बौद्धिक संपदा अधिकार, इनोवेशन, पर्यावरण से जुड़े नियम और सरकारी खरीद जैसे विषय शामिल हैं.

समझौते के तहत भारत भी करीब 90 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क कम करेगा या खत्म करेगा. इनमें से लगभग 85 प्रतिशत उत्पाद अगले 10 वर्षों में पूरी तरह ड्यूटी फ्री हो जाएंगे.

इसके अलावा, ब्रिटेन में सीमित अवधि के लिए काम करने वाले योग्य भारतीय पेशेवरों को भी राहत मिलेगी. ‘डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन’ के तहत उन्हें तय अवधि के दौरान दोनों देशों में सोशल सिक्योरिटी योगदान देने से छूट मिल सकती है.

कस्टम नियमों को लेकर सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेस एंड कस्टम्स (सीबीआईसी) ने भी दिशा-निर्देश जारी किए हैं. इनमें यह बताया गया है कि कौन-से उत्पाद सीईटीए के तहत टैरिफ लाभ पाने के योग्य होंगे और निर्यातकों व आयातकों को किन नियमों का पालन करना होगा.

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-भारत एक्सप्रेस



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