Bharat Express DD Free Dish
Pension Mission Shakti Digital
Pension Mission Shakti Digital

ईरान-अमेरिका जंग में पाकिस्तान की मध्यस्थता फेल! तेहरान ने ठुकराईं ट्रंप की 15 शर्तें, क्या अब और भीषण होगी जंग?

Iran ने अमेरिका की 15 शर्तों को “अवास्तविक” बताते हुए सीजफायर वार्ता से इनकार कर दिया. Pakistan की मध्यस्थता विफल होने से मिडिल ईस्ट में युद्ध और तेज होने की आशंका बढ़ गई है…

Iran rejects US ceasefire proposal: मिडिल ईस्ट में जारी महायुद्ध को रोकने के लिए पाकिस्तान द्वारा की जा रही शांति की कोशिशों को करारा झटका लगा है. ईरान ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित सीजफायर वार्ता में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है. दरअसल ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्ट में दावा किया है कि इस्लामाबाद में होने वाली इस हाई-प्रोफाइल बैठक से पहले ही ईरान ने हाथ खींच लिए हैं. इसको लेकर ईरान का कहना है कि अमेरिका की शर्तें ‘अवास्तविक और बेकार’ हैं, जिसके बाद अब युद्ध खत्म होने की उम्मीदें धूमिल होती नजर आ रही हैं.

पाकिस्तान की मेजबानी पर कैसे फिरा पानी?

ज्ञात रहे पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने बड़े उत्साह के साथ अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की पेशकश की थी. इस्लामाबाद इस बातचीत की मेजबानी कर खुद को एक वैश्विक शांतिदूत के रूप में स्थापित करना चाहता था लेकिन तेहरान के कड़े रुख ने पाकिस्तान की कूटनीतिक साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं. ईरान ने आधिकारिक तौर पर मध्यस्थों को बता दिया है कि वह फिलहाल इस्लामाबाद में अमेरिकी अधिकारियों के साथ एक मेज पर बैठने को तैयार नहीं है.

ट्रंप का प्रस्ताव पड़ा खटाई में…

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि बातचीत में अच्छी प्रगति हो रही है, लेकिन हकीकत इसके उलट निकली. ईरान को अमेरिका की तरफ से 15 बिंदुओं वाला एक समझौता प्रस्ताव भेजा गया था, जिसे ईरान के प्रवक्ता एस्माइल बाघई ने “ज्यादा और गलत मांगों का पुलिंदा” करार दिया है. ईरान ने साफ कर दिया है कि अमेरिका की शर्तें उसे स्वीकार्य नहीं हैं और वह किसी भी तरह के दबाव में आकर झुकने वाला नहीं है.

ईरान ने तीखी चेतावनी देते हुए क्या कहा?

ईरान ने स्पष्ट किया है कि भले ही युद्ध खत्म होना दुनिया के लिए अच्छा हो, लेकिन अमेरिका को अपनी गलतियां माननी होंगी. तेहरान का कहना है कि अमेरिका की ओर से भेजे गए प्रस्ताव ‘अवास्तविक’ हैं. ईरानी अधिकारियों ने मध्यस्थों से कहा कि अमेरिका केवल अपनी मनमानी थोपना चाहता है. तेहरान ने यह भी याद दिलाया कि इस जंग की शुरुआत किसने की थी, और अब जब तक उनकी संप्रभुता का सम्मान नहीं होता, तब तक कोई सीधी बातचीत मुमकिन नहीं है.

यह भी पढ़ें: ‘एयर स्ट्राइक’ का बजा सायरन…फिर मची अफरा-तफरी, दिल्ली के राजा गार्डन में आखिर क्या हुआ?

मिडल-ईस्ट में बढ़ेगा और तनाव?

शांति वार्ता के विफल होने के बाद अब युद्ध के और भी भीषण होने के आसार बढ़ गए हैं. एक तरफ अमेरिका ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत ईरान पर दबाव बना रहा है, तो दूसरी तरफ ईरान ने भी F−35 जैसे विमानों को निशाना बनाकर अपनी ताकत का अहसास कराया है.

वहीं पाकिस्तान की मध्यस्थता फेल होने का मतलब है कि अब क्षेत्रीय शक्तियों के पास बातचीत का विकल्प लगभग खत्म हो चुका है. अब दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ट्रंप प्रशासन इस ‘इनकार’ का जवाब सैन्य कार्रवाई से देता है या प्रतिबंधों के नए जाल से.

Also Follow Bharat Express on Youtube

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Pension Mission Shakti Digital