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क्या ट्रंप के लिए पाकिस्तान नहीं है सुरक्षित, इस्लामाबाद की जगह जिनेवा में क्यों हो रहा है ईरान-अमेरिका डील पर हस्ताक्षर?

US Israel Iran conflict: ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु समझौते पर जिनेवा में हस्ताक्षर होंगे. पाकिस्तान मेजबान होगा और दोनों देशों के नेता मौजूद रह सकते हैं. समझौते में हमले रोकने, आर्थिक राहत और परमाणु हथियार न बनाने की घोषणा शामिल है.

US Israel Iran conflict: ईरान और अमेरिका के बीच होने वाले परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर स्विट्जरलैंड के शहर जिनेवा में होंगे. इस मौके पर दोनों देशों का शीर्ष नेतृत्व मौजूद रह सकता है. चर्चा है कि ईरान की ओर से मसूद पजेशकियान और अमेरिका की ओर से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शामिल होंगे. समारोह की मेजबानी पाकिस्तान करेगा, जिसकी जानकारी खुद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दी है.

इस्लामाबाद क्यों नहीं चुना गया?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब पाकिस्तान मेजबान है तो बैठक इस्लामाबाद में क्यों नहीं हुई. दरअसल, शुरुआती दौर में समझौते की बैठक पाकिस्तान की राजधानी में ही हुई थी. मई के अंत में दूसरी बैठक की तैयारी भी इस्लामाबाद में की गई थी, लेकिन उस समय न तो ईरान और न ही अमेरिका के नेता वहां पहुंचे.

जिनेवा को क्यों चुना गया?

ईरान चाहता था कि इस डील पर हस्ताक्षर जिनेवा में ही हों. युद्ध की शुरुआत में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जिनेवा में प्रस्तावित थी, लेकिन उससे पहले ही हमला हो गया. अब ईरान यह संदेश देना चाहता है कि अमेरिका को वहीं लौटना पड़ा जहां से उसने बातचीत छोड़ी थी. जिनेवा पहले भी कई ऐतिहासिक शांति समझौतों का गवाह रहा है, जैसे फ्रांस-वियतनाम और सोवियत संघ-अफगानिस्तान के बीच हुए समझौते. यही वजह है कि इसे शांति की राजधानी कहा जाता है.

सुरक्षा का पहलू

सुरक्षा भी एक अहम कारण है. हस्ताक्षर समारोह में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप मौजूद रह सकते हैं. इस्लामाबाद को अमेरिकी राष्ट्रपतियों के लिए पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जाता. आखिरी बार 2006 में राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने पाकिस्तान का दौरा किया था.

समझौते की शर्तें

ईरान और अमेरिका के बीच 14 बिंदुओं वाला अस्थाई समझौता हुआ है. इसके तहत अमेरिका ईरान पर हमला नहीं करेगा और ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को खोल देगा. यूरेनियम संवर्धन पर भी आगे बातचीत होगी. ईरान एनपीटी के तहत परमाणु हथियार न बनाने की घोषणा करेगा. इसके बाद आर्थिक प्रतिबंध हटेंगे और फ्रीज की गई संपत्ति अनफ्रीज होगी. ईरान को राहत के लिए 300 अरब डॉलर दिए जाएंगे, जिनमें से अधिकतर रकम खाड़ी देशों से आएगी.

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इजरायल का विरोध

हालांकि, इस समझौते को इजराइल ने नकार दिया है. उसका कहना है कि उसके सैनिक लेबनान से पीछे नहीं हटेंगे.

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-भारत एक्सप्रेस



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