पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पहले से ही बिजली-आटे और रोटी के लिए मचे गृहयुद्ध के बीच वहां की हुकूमत ने एक ऐसा आत्मघाती कदम उठा लिया है, जिससे पूरे पाकिस्तान में भूचाल आ गया है. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक बेहद भड़काऊ बयान देते हुए खुलेआम कह दिया है कि PoK के रावलाकोट और मीरपुर में रहने वाले लोग ‘असली कश्मीरी’ हैं ही नहीं…
इस एक बयान (Khawaja Asif PoK Statement) ने पाकिस्तान के उस क्रूर सच पर मुहर लगा दी है जिसे भारत सालों से दुनिया के सामने रख रहा था. इस महा-ब्लंडर के बाद PoK की सड़कों पर जनता का गुस्सा फूट पड़ा है और पाकिस्तान के खिलाफ विद्रोह तेज हो गया है.
दरअसल, पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने यह अजीबोगरीब तर्क दिया कि मीरपुर और रावलाकोट के लोग पारंपरिक कश्मीरी भाषा बोलने के बजाय ‘पोटोहारी’ और ‘पहाड़ी’ बोलियों का इस्तेमाल करते हैं, इसलिए वे असली कश्मीरी नहीं हैं. जिस क्षेत्र को पाकिस्तान हमेशा से अपनी मुख्य पहचान का हिस्सा बताता था, उसी के नागरिकों को सिर्फ भाषा के आधार पर ‘पराया’ घोषित कर दिया गया.
इस बयान के आते ही PoK के चौराहों पर बारूद में चिंगारी लग गई है. स्थानीय नेताओं और प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह उनकी सांस्कृतिक पहचान पर इस्लामाबाद का सीधा और दमनकारी हमला है.
भारतीय रणनीतिक और राजनयिक सूत्रों के मुताबिक, ख्वाजा आसिफ ने अनजाने में भारत को एक ऐसा कानूनी और नैतिक हथियार दे दिया है, जिससे संयुक्त राष्ट्र (UN) और ओआईसी (OIC) जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पिछले 70 सालों से फैलाए जा रहे इस्लामाबाद के कश्मीर एजेंडे की धज्जियां उड़ जाएंगी.
जब देश के रक्षा मंत्री ने खुद ही यह मान लिया कि वहां की बहुसंख्यक आबादी कश्मीरी नहीं है, तो पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद यह स्वीकार कर लिया है कि PoK पर उसका कब्जा पूरी तरह से अवैध, जबरदस्ती थोपा गया एक मिलिट्री कंट्रोल है. अब दुनिया के सामने पाकिस्तान के इस ढोंग को बेनकाब करना भारत के लिए और भी आसान हो जाएगा.
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यह भड़काऊ बयान (Khawaja Asif PoK Statement) ऐसे समय में आया है जब पूरा PoK भीषण आर्थिक बदहाली से जूझ रहा है. आसमान छूती महंगाई और सेना प्रमुख आसिम मुनीर के हिंसक सैन्य क्रैकडाउन के खिलाफ लोग महीनों से सड़कों पर गोलियां खा रहे हैं.
अपनी इसी विफलता और बदहाली से दुनिया का ध्यान भटकाने के लिए हमेशा की तरह पाकिस्तानी हुकूमत ने इसका ठीकरा नई दिल्ली पर फोड़ने की कोशिश की थी, लेकिन भारत ने इसे सिरे से खारिज करते हुए साफ कह दिया कि यह आरोप पाकिस्तान की अपनी बदहाली को छिपाने की एक बेहद हताश और नाकाम कोशिश है.
-भारत एक्सप्रेस
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