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वैश्विक पटल पर सनातन का परचम: लंदन में गूंजी संतों की एकजुट आवाज, दिया वसुधैव कुटुंबकम का संदेश

London Sant Sansad 2026: लंदन के दर्शन दरबार में 9 अगस्त 2026 को ऐतिहासिक संत संसद का मुख्य कार्यक्रम आयोजित हुआ. भारत और विदेशों से पहुंचे संतों व आध्यात्मिक गुरुओं ने सनातन मूल्यों, विश्व शांति, आपसी सद्भाव, विविधता में एकता और वसुधैव कुटुंबकम का संदेश दिया.

London Sant Sansad 2026: इंग्लैंड की धरती पर पहली बार आयोजित ऐतिहासिक ‘संत संसद’ का तीसरा और मुख्य कार्यक्रम 9 अगस्त 2026 को लंदन के ‘दर्शन दरबार’ में भव्य माहौल के बीच संपन्न हुआ. सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों और मानवता का संदेश देने वाले इस आयोजन में भारत और विदेशों से पहुंचे संतों, महात्माओं और आध्यात्मिक गुरुओं ने हिस्सा लिया. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साध-संगत भी मौजूद रही.

विविधता में एकता

दास धरम (सच्चखंड नानक धाम) की ओर से आयोजित इस संत संसद की थीम ‘Unity in Diversity to Connect Community’ यानी ‘सामुदायिक जुड़ाव के लिए विविधता में एकता’ रखी गई थी. आयोजन का मकसद अलग-अलग समुदायों और परंपराओं के बीच आपसी जुड़ाव बढ़ाने के साथ सनातन मूल्यों और आध्यात्मिक विचारों को वैश्विक मंच तक पहुंचाना था.

कीर्तन और भजनों से हुई कार्यक्रम की शुरुआत

समागम की शुरुआत दास धरम के प्रमुख संत त्रिलोचन दर्शन दास जी महाराज के रूहानी कीर्तन और भजनों से हुई. इसके बाद मंच पर देश-विदेश से आए कई प्रमुख संतों और आध्यात्मिक गुरुओं ने अपने विचार रखे. परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के स्वामी चिदानंद सरस्वती जी महाराज और महामंडलेश्वर स्वामी यतिंद्रानंद गिरी जी समेत कई संतों की मौजूदगी ने आयोजन को विशेष बना दिया.

संतों ने दिया विश्व शांति का संदेश

कार्यक्रम के दौरान संतों ने अपने संबोधन में विश्व शांति, आपसी प्रेम, सद्भाव और मानव कल्याण पर जोर दिया. वक्ताओं ने कहा कि आज जब समाज कई तरह की चुनौतियों से गुजर रहा है, ऐसे समय में धर्म और समुदाय की सीमाओं से ऊपर उठकर एक-दूसरे को समझना जरूरी है. संतों ने सर्वधर्म समन्वय को समाज में सकारात्मक बदलाव का महत्वपूर्ण रास्ता बताया.

प्रवासी भारतीयों को संस्कृति से जोड़ने पर जोर

संत संसद में विदेशों में रहने वाले भारतीयों और खासकर नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखने की बात भी प्रमुखता से उठी. संतों ने कहा कि अपनी भाषा, परंपराओं, संस्कारों और संस्कृति से जुड़ाव आने वाली पीढ़ियों के लिए पहचान और आत्मविश्वास का आधार बन सकता है.


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महाप्रसाद और अटूट लंगर के साथ हुआ समापन

आयोजन के अंत में दूर-दराज से पहुंचे साध-संगत के लिए महाप्रसाद और गुरु का अटूट लंगर लगाया गया. श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया और संतों से आशीर्वाद लिया. इस तरह लंदन की संत संसद आध्यात्मिकता, एकता, भाईचारे और मानवता का संदेश देते हुए संपन्न हुई.

-भारत एक्सप्रेस



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