Canada’s New Prime Minister: दुनिया के दूसरे सबसे बड़े देश कनाडा को नया प्रधानमंत्री मिला है. एक पूर्व केंद्रीय बैंकर मार्क कार्नी ने वहां राजनीति में बड़ा उलटफेर करते हुए प्रधानमंत्री पद हासिल कर लिया है. लिबरल पार्टी, जिसे कुछ महीने पहले तक कमजोर माना जा रहा था, ने एक बार फिर सत्ता में वापसी करते हुए इतिहास रच दिया है. यह पार्टी की लगातार चौथी जीत है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कनाडा को अमेरिका में मिलाने की धमकी और आयात शुल्क बढ़ाने की नीति ने देश में राष्ट्रवाद की भावना को जगाया. इन बयानों ने लिबरल पार्टी के पक्ष में जनसमर्थन बढ़ाया और कनाडाई जनता ने कंजरवेटिव पार्टी के बजाय लिबरल पार्टी को बेहतर विकल्प माना जो ट्रंप के सामने मजबूती से खड़ी हो सके.

ट्रूडो का इस्तीफा और कार्नी की नियुक्ति
जनवरी 2025 में जस्टिन ट्रूडो ने पार्टी में आंतरिक असंतोष और वित्त मंत्री क्रिस्टिया फ्रीलैंड के इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री पद छोड़ दिया. इसके बाद मार्च में मार्क कार्नी को पार्टी का नया नेता और प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया गया. कार्नी ने चुनाव अभियान में ट्रंप की नीतियों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “ट्रंप हमारे काम, व्यापार और जीवनशैली पर हमला कर रहे हैं. हम इसे सफल नहीं होने देंगे.”
चुनावी नतीजे और बहुमत की स्थिति
खबर लिखे जाने तक लिबरल पार्टी ने 146 सीटें जीत ली थीं, और 22 पर आगे चल रही थी. यदि यह आंकड़ा बरकरार रहा, तो पार्टी कुल 168 सीटें हासिल कर सकती है – जो बहुमत से थोड़ा कम है (बहुमत के लिए 172 सीटें जरूरी हैं). दूसरी ओर, कंजरवेटिव पार्टी ने 128 सीटें जीतीं और 16 पर आगे चल रही थी.

जगमीत सिंह और एनडीपी का पतन
पूर्व प्रधानमंत्री ट्रूडो की अल्पमत सरकार का समर्थन करने वाले जगमीत सिंह इस बार चुनाव हार गए हैं और उनकी पार्टी एनडीपी को करारी हार का सामना करना पड़ा है. पिछले चुनाव में जहां पार्टी ने 24 सीटें जीती थीं, इस बार वह केवल 7 सीटों तक सिमटती नजर आ रही है.
टेक्नोक्रेट नेता से पीएम तक का सफर
मार्क कार्नी ने संकट काल में बैंक ऑफ कनाडा और बैंक ऑफ इंग्लैंड को कुशल नेतृत्व दिया था. आर्थिक स्थिरता के प्रतीक माने जाने वाले कार्नी अब राजनीतिक स्थिरता के पर्याय के रूप में उभर रहे हैं. उन्होंने कहा, “मेरी जिंदगी के हर अनुभव ने मुझे इस क्षण के लिए तैयार किया है.”
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