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खाली सीटें, खून से सने बैग और वो 165 मासूम चेहरे…पाकिस्तान पहुंचे ईरानी डेलीगेशन ने बातचीत से पहले दिया बड़ा मैसेज!

इस्लामाबाद में US-Iran वार्ता से पहले ईरान ने ‘Minab 168’ विमान के जरिए भावनात्मक दबाव बनाया. Donald Trump प्रशासन के लिए अब यह बातचीत और कठिन हो गई है…

US Iran Islamabad Meeting update: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आज जब अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडल आमने-सामने बैठेंगे, तो माहौल केवल कूटनीति का नहीं बल्कि गहरे जख्मों का भी होगा. शांति की तलाश में पहुंचे ईरानी दल ने बातचीत शुरू होने से पहले ही पूरी दुनिया को एक ऐसी तस्वीर (Minab 168 Plane)  दिखाई है, जिसने व्हाइट हाउस की बेचैनी बढ़ा दी है. ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह समझौते की मेज पर जरूर आया है लेकिन उसकी आंखों के सामने अभी भी ‘मिनाब हमले’ में मारी गई उन 165 मासूम बच्चियों का खून और चीखें मौजूद हैं.

मिनाब 168: ईरान ने क्या मैसेज दिया?

दरअसल ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर कालिबाफ जिस विशेष विमान ‘मिनाब 168’ से इस्लामाबाद पहुंचे, उसके अंदर का नज़ारा देख हर कोई दंग रह गया. विमान की दर्जनों सीटों पर कोई इंसान नहीं बल्कि उन बच्चियों की तस्वीरें रखी गई थीं जो 28 फरवरी के अमेरिकी-इजरायली हमले में शहीद हुई थीं.

उन तस्वीरों के साथ कुर्सियों पर खून से सने स्कूल बैग, बुरी तरह जले हुए छोटे जूते और सफेद फूल रखे नजर आए. ईरानी नेता इन तस्वीरों को टकटकी लगाए भावुक होकर देख रहे थे, जो इस बात का सीधा संकेत है कि ईरान इस ‘नरसंहार’ को भूले बगैर ही समझौते की शर्तें तय करेगा.

मीनाब के गर्ल्स स्कूल पर हुआ वो घातक प्रहार

ईरान के मीनाब शहर में हुआ वह हमला आज भी दुनिया की रूह कंपा देता है. युद्ध के पहले ही दिन (28 फरवरी) अमेरिका और इजरायल की मिसाइलों ने एक गर्ल्स स्कूल को निशाना बनाया था. उस मंजर की जो तस्वीरें सामने आई थीं, उनमें केवल तबाही, मासूमों के कटे हुए हाथ और खून से सनी किताबें ही नजर आ रही थीं.

बता दें कि इस हमले में 165 से ज्यादा बच्चियों की जान चली गई थी. भले ही राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे ‘कोलैटरल डैमेज’ बताकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की हो और कहा हो कि निशाना सैन्य अड्डा था, लेकिन ईरान ने इसे सीधे तौर पर मासूमों की हत्या करार दिया है.

‘खून का हिसाब’ मांगेगा तेहरान?

इस्लामाबाद की इस हाई-लेवल मीटिंग (US Iran Islamabad Meeting) में एक तरफ अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अपनी जीत का दावा करेंगे, तो दूसरी तरफ ईरानी डेलिगेशन की आंखों में मिनाब का दर्द होगा. जानकारों का मानना है कि ईरान ने इन बैगों और जूतों की प्रदर्शनी लगाकर ट्रंप प्रशासन पर एक मनोवैज्ञानिक दबाव बना दिया है.

ईरान यह संदेश दे रहा है कि वह झुककर समझौता नहीं कर रहा, बल्कि उन मासूमों के लिए इंसाफ और ‘हर्जाने’ की मांग पर अड़ा रहेगा. ऐसे में अमेरिका के लिए शांति प्रस्ताव को स्वीकार करवाना अब लोहे के चने चबाने जैसा होने वाला है.

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क्या इस्लामाबाद में थमेगा युद्ध?

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने साफ कर दिया है कि भले ही वे युद्ध खत्म करना चाहते हैं, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं कि वे अपने शहीदों को भूल गए हैं. विमान के अंदर की यह तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी है, जिसे ईरान ने ‘इस उड़ान में मेरे साथी’ कैप्शन के साथ साझा किया है. आज जब जेडी वेंस और जेरेड कुशनर मेज पर बैठेंगे, तो उनके सामने सिर्फ 10 या 15 सूत्रीय प्रस्ताव नहीं होगा, बल्कि उन 168 जिंदगियों का हिसाब भी होगा, जिनकी यादें ईरान अपने साथ लेकर पाकिस्तान आया है.

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-भारत एक्सप्रेस



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