Iran war ceasefire Pakistan draft post: मिडल-ईस्ट में पिछले 38 दिनों से जारी भीषण युद्ध पर अचानक लगे ‘विराम’ ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को दी गई विनाशकारी हमले की डेडलाइन खत्म होने से महज 2 घंटे पहले संघर्ष विराम (Ceasefire) का ऐलान हुआ. इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर ढोल पीटा जा रहा था, लेकिन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की एक ‘सोशल मीडिया गलती’ ने इस पूरी मध्यस्थता की पोल खोलकर रख दी है. शरीफ के एक ‘ड्राफ्ट’ पोस्ट ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पाकिस्तान ने वाकई अपने दम पर मध्यस्थता की या सिर्फ किसी और की लिखी स्क्रिप्ट पढ़ रहा था?
क्या था वो ड्राफ्ट पोस्ट जिसने खोली पोल?
दरअसल 7 और 8 अप्रैल की दरमियानी रात 12:46 बजे पीएम शहबाज शरीफ के आधिकारिक ट्वीटर हैंडल से एक पोस्ट हुआ, जिसने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में खलबली मचा दी. इस पोस्ट की शुरुआत ‘Draft-Pakistan’s PM Message on X’से हुई थी. आमतौर पर किसी देश के प्रधानमंत्री की सोशल मीडिया टीम अपने ही पीएम के लिए ‘पाकिस्तान पीएम’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल ड्राफ्ट में नहीं करती.

इससे यह अंदेशा गहरा गया है कि यह मैसेज पाकिस्तान के भीतर नहीं बल्कि बाहर से (शायद ट्रंप की टीम या किसी अन्य देश से) भेजा गया था, जिसे शरीफ की टीम ने बिना पढ़े ‘कॉपी-पेस्ट’ कर दिया. हालांकि एक मिनट के भीतर इसे एडिट कर दिया गया, लेकिन तब तक इसके स्क्रीनशॉट पूरी दुनिया में वायरल हो चुके थे.
पीएम शरीफ के सीजफायर वाले पोस्ट में क्या?
पीएम शरीफ ने अपने पोस्ट में राष्ट्रपति ट्रंप से ‘विनम्रता’ के साथ अनुरोध किया था कि कूटनीति को मौका देने के लिए अपनी सैन्य कार्रवाई की डेडलाइन को 2 हफ्ते के लिए आगे बढ़ा दें. साथ ही, उन्होंने ‘ईरानी भाइयों’ से भी अपील की कि सद्भावना के तौर पर इसी अवधि के लिए ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) को खोल दिया जाए ताकि वैश्विक व्यापार बहाल हो सके. ट्रंप ने बाद में ऐलान किया कि वह शरीफ और पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के साथ बातचीत के आधार पर इस सीजफायर के लिए राजी हुए हैं.
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ईरान युद्ध सीजफायर में पर्दे के पीछे कौन?
सीजफायर का श्रेय लेने की होड़ में वैश्विक मीडिया भी बंटा हुआ नजर आ रहा है. जहां ‘CNN’ इस पूरी सफलता का सेहरा पाकिस्तान के सिर बांध रहा है, वहीं ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ और समाचार एजेंसी ‘AP’ के सूत्रों का दावा है कि इस शांति वार्ता के असली सूत्रधार चीनी अधिकारी थे.
दावा किया जा रहा है कि चीन ने ही ईरान को अमेरिका के साथ सीधे युद्ध से बचने और सीजफायर का रास्ता तलाशने के लिए प्रोत्साहित किया. पाकिस्तान को केवल एक ‘फ्रंट फेस’ के तौर पर इस्तेमाल किया गया ताकि अमेरिका और ईरान के बीच एक न्यूट्रल दिखने वाला चैनल बना रहे.
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-भारत एक्सप्रेस
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