Bharat Express DD Free Dish
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital

‘हम उसे भरोसेमंद नहीं मानते…’, क्या ‘सीजफायर’ ने बिगाड़े अमेरिका-इजरायल संबंध? इजराइली एम्बेसडर ने खोली पोल

Middle East Ceasefire Updates: मिडिल ईस्ट में सीजफायर से अमेरिका और इजरायल के बीच कोई ‘कोल्ड वॉर’ शुरू हो गई है? शांति की इस टेबल पर ‘मध्यस्थ’ के रूप में पाकिस्तान की एंट्री पर भारत में बैठे इजराइली राजदूत के बयान ने वाशिंगटन से यरूशलम तक खलबली मचा दी है.

Pakistan Role In US Iran Ceasefire Impact Israel America Relations What Said Israeli Ambassador Reuven Azar Bharat Express Hindi News

US Iran Ceasefire Updates: बारूद के धुएं और सायरन की गूंज के बीच जब सीजफायर का ऐलान होता है, तो दुनिया राहत की सांस लेती है. लेकिन कूटनीति की दुनिया में दिखने वाली शांति अक्सर किसी बड़े तूफान से पहले का सन्नाटा होती है. अमेरिका और ईरान के बीच हुए ताजा सीजफायर ने भले ही कुछ वक्त के लिए मिसाइलों की रफ्तार रोक दी हो, लेकिन इसने एक नए कूटनीतिक भूचाल को जन्म दे दिया है. इस भूचाल के केंद्र में है ‘पाकिस्तान’. इसे लेकर भारत में इजरायली राजदूत का भी बयान आया है.

शांति समझौते में पाकिस्तान को मध्यस्थ (Pakistan Role In US Iran Ceasefire) बनाए जाने से इजरायल बुरी तरह खफा नजर आ रहा है. हालात ये हैं कि दुनिया के सामने अटूट दोस्ती का दावा करने वाले अमेरिका और इजरायल के बीच अब अविश्वास की लकीरें साफ खिंचती दिख रही हैं.

‘हम पाकिस्तान को भरोसेमंद नहीं मानते’ (US Iran Ceasefire News)

नई दिल्ली में बैठे इजरायल के राजदूत रियूवेन अजार ने वो बात कह दी है, जो शायद यरूशलम में नेतन्याहू सरकार बंद कमरों में सोच रही है. पाकिस्तान के मीडिएटर बनने के सवाल पर रियूवेन अजार ने दो टूक शब्दों में कहा-

‘हम पाकिस्तान को एक भरोसेमंद प्लेयर (खिलाड़ी) के तौर पर बिल्कुल नहीं देखते. यूनाइटेड स्टेट्स ने अपने किसी निजी कारण या ‘वजह’ से पाकिस्तान की मदद लेने का फैसला किया है.’

यह सिर्फ एक बयान नहीं है, बल्कि अमेरिका के कूटनीतिक फैसले पर इजरायल का सीधा वार है. इजरायल का मानना है कि जो देश खुद आतंकवाद और अस्थिरता का केंद्र रहा है, वो मिडिल ईस्ट में शांति का पैरोकार कैसे हो सकता है. अजार ने याद दिलाया कि कैसे अतीत में भी अमेरिका ने अपने फायदे के लिए कतर और तुर्की जैसे ‘प्रॉब्लम’ (विवादित) देशों का इस्तेमाल हमास के साथ एग्रीमेंट करने के लिए किया था.

असलियत पर एक राय होना जरूरी (US Iran Ceasefire Break)

इजरायल के इस कड़े रुख के पीछे उसकी अपनी सुरक्षा चिंताएं हैं. इजराइली राजदूत ने अमेरिका को नसीहत देते हुए कहा कि हमारे लिए यह बहुत जरूरी है कि हम जो नतीजा चाहते हैं, उसके सार और असलियत के मामले में यूनाइटेड स्टेट्स के साथ हमारा तालमेल बना रहे. इजरायल नहीं चाहता कि सीजफायर की आड़ में ईरान या हमास जैसे उसके दुश्मन पाकिस्तान या तुर्की जैसे देशों के जरिए कोई नया ‘बैकडोर’ समर्थन हासिल कर लें.

ये भी पढ़ें: सीजफायर के नाम पर हुआ धोखा? इजरायल ने लेबनान में किया अब तक का सबसे बड़ा अटैक, जवाब में ईरान ने फिर बंद किया होर्मुज

कूटनीति की बिसात पर मोहरे कब दोस्त से दुश्मन और दुश्मन से मध्यस्थ बन जाएं, कहा नहीं जा सकता. इजरायल और अमेरिका दशकों से एक-दूसरे के रणनीतिक साये रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान की इस एंट्री ने दोनों देशों के बीच एक ‘ट्रस्ट डेफिसिट’ को उजागर कर दिया है. सवाल यह नहीं है कि सीजफायर कितने दिन टिकेगा, बल्कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान रूपी इस ‘तीसरे पहिए’ की वजह से अमेरिका और इजरायल के रिश्तों की गाड़ी पटरी से उतर जाएगी?



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Kanya Sumangla Mission Shakti Digital