Saudi-Yemen War Pak Entry: मिसाइलों और ड्रोनों के हमलों से थर्राते मध्य-पूर्व के बीच पाकिस्तान ने यमन के हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब में अपने लड़ाकू विमान और थल सेना के 8,000 जवान तैनात कर दिए हैं. ‘मक्का रक्षा समझौते’ के तहत उठाया गया यह कदम भले ही इस्लामाबाद के लिए रक्षा कूटनीति का बड़ा दांव दिख रहा हो, लेकिन सामरिक विशेषज्ञों के मुताबिक पाकिस्तान एक ऐसे खतरनाक दलदल में कूद चुका है जहाँ से उसकी वापसी बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाली है.
ग्वादर पर मंडराया समुद्री युद्ध का खतरा?(Saudi-Yemen War Pak Entry)
पाकिस्तान की सीधी सैन्य एंट्री के बाद यमन के हूती विद्रोहियों ने पूर्ण पैमाने पर युद्ध की तैयारी शुरू कर दी है. हूतियों की रणनीतिक नजरें अब पाकिस्तान के कराची और ग्वादर जैसे महत्वपूर्ण बंदरगाहों पर टिक गई हैं. यदि हूती विद्रोही हिंद महासागर, लाल सागर और होर्मुज की खाड़ी में पाकिस्तानी जहाजों की नाकेबंदी करते हैं, तो पाकिस्तान का समुद्री व्यापार पूरी तरह ठप हो सकता है और युद्ध का मैदान सीधे उसके दरवाजे तक आ पहुंचेगा.
घरेलू मोर्चे पर शिया-सुन्नी संघर्ष और गृहयुद्ध जैसी स्थिति
पाकिस्तान के इस कदम का सबसे भयानक असर उसके अपने देश के भीतर पड़ सकता है. शिया बहुल हूतियों के खिलाफ सुन्नी बहुल पाकिस्तान की कार्रवाई से देश के भीतर भारी जनअसंतोष पनप रहा है. खैबर पख्तूनख्वा, कराची और पीओके (PoK) जैसे शिया आबादी वाले इलाकों में आंतरिक हिंसा भड़कने का गंभीर जोखिम है. पूर्व में हुए अमरीका-विरोधी उग्र प्रदर्शनों (जिसमें 32 से अधिक लोग मारे गए थे) की तर्ज पर पाकिस्तान में एक बार फिर सांप्रदायिक हिंसा का नया दौर शुरू हो सकता है.
चारों तरफ से अलग-थलग पड़ने का जोखिम
हूतियों को ईरान का प्रत्यक्ष समर्थन प्राप्त है. यदि यमन में हूतियों की स्थिति कमजोर होती है, तो ईरान सीधे मैदान में उतर सकता है. पहले से ही भारत और अफगानिस्तान के साथ तनातनी झेल रहे पाकिस्तान के लिए पड़ोसी देश ईरान से दुश्मनी मोल लेना रणनीतिक खुदकुशी जैसा होगा. तेहरान के खिलाफ मोर्चा खोलने से पाकिस्तान क्षेत्रीय रूप से पूरी तरह से अलग-थलग (Isolated) पड़ सकता है.
बेअसर साबित होगा ‘परमाणु शील्ड’ का ढोल
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की द्वारा पाकिस्तान की परमाणु क्षमता का हौवा खड़ा कर हूतियों को डराने की कोशिश की जा रही है. लेकिन तेहरान और हूती विद्रोहियों के लिए परमाणु संपन्न देशों से टकराना कोई नया खेल नहीं है-वे पिछले कई महीनों से अमेरिका और इजरायल जैसी महाशक्तियों से सीधे लोहा ले रहे हैं. ऐसे में पाकिस्तान का परमाणु कार्ड यमन की गुरिल्ला वारफेयर के आगे बेअसर ही साबित होगा.
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भारत की अर्थव्यवस्था और व्यापार पर पड़ेगा सीधा असर
अगर यह संघर्ष (Saudi-Yemen War Pak Entry) लाल सागर और अरब सागर से होता हुआ हिंद महासागर तक फैलता है, तो भारत के लिए ईंधन आपूर्ति और यूरोपीय देशों के साथ होने वाला व्यापार प्रभावित हो सकता है. जहाजों को अफ्रीका के ‘केप ऑफ गुड होप’ से होकर गुजरना पड़ेगा, जिससे परिवहन समय और लागत दोनों में भारी बढ़ोतरी होगी.
सऊदी अरब के तेल टैंकरों और हवाई अड्डों की सुरक्षा के नाम पर यमन के गृहयुद्ध में सीधे कूदना पाकिस्तान के लिए भारी पड़ने वाला है. पाकिस्तान के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों ने भी इसे एक “नासमझी भरा कदम” करार दिया है, जो देश को एक ना खत्म होने वाले युद्ध और आंतरिक तबाही की ओर धकेल सकता है.
-भारत एक्सप्रेस
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