Lashkar-E-Taiba: भारतीय सेना ने मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के भींबर-बरनाला में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी कैंप तबाह कर दिया था. लेकिन अब लश्कर फिर से खैबर पख्तूनख्वा में नया कैंप तैयार कर रहा है. यह कैंप जामिया अहले सुन्नत मस्जिद के पास 46 हजार वर्ग फीट में बनाया जा रहा है और दिसंबर तक पूरी तरह तैयार हो सकता है.
माना जा रहा है कि यह जगह भारत विरोधी गतिविधियों का नया अड्डा बन सकती है. इस कैंप की जिम्मेदारी तीन पुराने और खतरनाक आतंकियों को दी गई है जिनका नाम पहले भी कई आतंकी घटनाओं में सामने आ चुका है.
किसको बनाया गया चीफ
नसर जावेद को इस कैंप का चीफ बनाया गया है. वह 2007 के हैदराबाद ब्लास्ट का मास्टरमाइंड है जिसमें दो धमाकों में कुल 48 लोगों की जान गई थी. नसर इस कैंप का संचालन करेगा और फंडिंग, भर्ती और आतंकी मॉड्यूल तैयार करने जैसे काम देखेगा. उसका मकसद पुराने नेटवर्क से जुड़कर नए आतंकियों को तैयार करना है.
ट्रेनिंग की जिम्मेदारी किसे दी गई
हम्मद यासीन उर्फ बिलाल भाई को वैचारिक ट्रेनिंग की जिम्मेदारी दी गई है. वह युवाओं को कट्टरपंथी सोच से जोड़ता है और धर्म के नाम पर आतंक के लिए प्रेरित करता है. ऑनलाइन प्रचार और भाषणों के जरिए वह रेडिकलाइजेशन करता है ताकि नए आतंकी मानसिक रूप से तैयार हो सकें.
अनस उल्लाह खान को ट्रेनिंग देने का काम
अनस उल्लाह खान को हथियारों की ट्रेनिंग देने का काम सौंपा गया है. उसे हथियारों का मास्टर कहा जाता है. वह बंदूक, ग्रेनेड, IED और छिपकर हमले की तकनीक सिखाता है. अनस पहले भी खैबर पख्तूनख्वा के गढ़ी हबीबुल्लाह में ट्रेनिंग ले चुका है और अब नए लड़कों को ऑपरेशनल मिशन के लिए तैयार करेगा.
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यह नया कैंप भारत की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है और इसकी गतिविधियों पर नजर रखना बेहद जरूरी है.
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-भारत एक्सप्रेस
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