नेपाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा मोड़ आया है. पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की (Sushila Karki, Gen-Z, Nepal ) को अंतरिम प्रधानमंत्री बनाए जाने के तीन दिन बाद ही उनके खिलाफ विरोध शुरू हो गया है. सोमवार को प्रधानमंत्री आवास के बाहर ‘हम नेपाली’ एनजीओ के नेतृत्व में जेनरेशन-जेड (Gen-Z) ने जोरदार प्रदर्शन किया. इस प्रदर्शन में उन परिवारों के लोग भी शामिल थे जिनके बच्चों की मौत पुलिस फायरिंग में हुई थी.
प्रदर्शनकारियों का क्या आरोप है?
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कार्की (Sushila Karki, Gen-Z, Nepal ) ने प्रधानमंत्री बनते ही आंदोलन की मूल मांगों को नजरअंदाज कर दिया है. उन्होंने बिना सलाह के ही तीन मंत्रियों की नियुक्ति कर दी. जिसमें कुलमान घिसिंग को ऊर्जा मंत्रालय, ओम प्रकाश आर्यल को गृह मंत्रालय और रामेश्वर खनाल को वित्त मंत्रालय दिया गया है. खासतौर पर ओम प्रकाश आर्यल की नियुक्ति पर सवाल उठाए जा रहे हैं जिन्हें प्रदर्शन में कभी देखा ही नहीं गया. कहा जा रहा है कि उन्हें बालेंद्र साह के कहने पर मंत्री बनाया गया है जो आगामी चुनाव में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं.
अगले 6 महीने नें चुनाव की जिम्मेदारी
इस विरोध के बाद केपी शर्मा ओली ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था और राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने संसद भंग कर दी. Gen-Z की सिफारिश पर पौडेल ने सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री नियुक्त किया. उन्हें अगले छह महीने में निष्पक्ष चुनाव कराने की जिम्मेदारी दी गई है. चुनाव के बाद चुने गए नेता को कार्की सत्ता सौंपेंगी.
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नेपाल में कैसे होता है चुनाव?
नेपाल में प्रधानमंत्री का चयन प्रतिनिधि सभा के जरिए होता है, जिसमें कुल 275 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए 138 सीटों की जरूरत होती है. फिलहाल देश में राजनीतिक माहौल गर्म है और Gen-Z की नाराजगी ने अंतरिम सरकार की राह को चुनौतीपूर्ण बना दिया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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