Nepal Sushila Karki Cabinet: नेपाल में हुई Gen-Z क्रांति ने न सिर्फ सरकार को हिलाकर रख दिया, बल्कि देश की पूरी राजनीतिक दिशा ही बदल दी. सड़कों पर उतरे युवा और जनता के भारी आक्रोश के कारण जहां एक ओर प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा. इसके बाद अब देश को एक नई अंतरिम सरकार मिली है. इस सरकार के गठन को सीधे तौर पर उस जन-आंदोलन का परिणाम माना जा रहा है, जिसने नेताओं को यह अहसास कराया कि अब उनकी मनमानी नहीं चलेगी. खैर अब देश सुशीला कार्की के नेतृत्व में शांति की राह तलाश रहा है. अब उनके सहयोग के लिए देश को 4 नए मंत्री मिल गए हैं.
सोमवार को काठमांडू के शीतल निवास में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इसमें राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने 4 मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. यह सभी मंत्री, सुशीला कार्की के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार का काम करने में सहयोग करेंगे.
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4 नए मंत्रियों की जिम्मेदारियां (New Ministers In Nepal)
- महावीर पुन: मैग्सेसे पुरस्कार विजेता महावीर पुन को शिक्षा और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे राष्ट्रीय नवप्रवर्तन केंद्र के संस्थापक भी हैं।
- अनिल कुमार सिन्हा: पूर्व न्यायाधीश अनिल कुमार सिन्हा ने भी मंत्री पद की शपथ ली. उन्हें उद्योग, वाणिज्य एवं आपूर्ति मंत्रालय, विधि एवं न्याय मंत्रालय और भूमि सुधार, सहकारिता एवं गरीबी उन्मूलन मंत्रालय सौंपा गया है.
- जगदीश खरेल: इमेज चैनल्स के संपादक जगदीश खरेल को सूचना एवं संचार मंत्री बनाया गया है.
- मदन प्रसाद परियार: मदन प्रसाद परियार कृषि मंत्री होंगे.
अंतरिम सरकार के अन्य मंत्री (Nepal Interim Government)
- रामेश्वर खनल: वित्त मंत्री रामेश्वर खनल को नेपाल की अर्थव्यवस्था और वित्तीय प्रशासन की गहरी समझ है. वे पूर्व वित्त सचिव भी रह चुके हैं.
- कुलमान घीसिंग: कुलमान घीसिंग को ऊर्जा, जल संसाधन एवं सिंचाई, भौतिक अवसंरचना एवं परिवहन और शहरी विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली है. घीसिंग नेपाल विद्युत प्राधिकरण कार्यकारी निदेशक भी रह चुके हैं.
- ओम प्रकाश आर्यल: गृह मंत्रालय, कानून, न्याय और संसदीय कार्य मंत्रालय की जिम्मेदारी ओम प्रकाश आर्यल को मिली है. कानूनी पेशे से जुड़े ओम प्रकाश आर्यल को नेपाल के संविधान की अच्छी समझ है.
अब नेपाल को नई उम्मीद (Nepal Revolution)
नेपाल में इन नए मंत्रियों की नियुक्ति यह दिखाती है कि Gen-Z आंदोलन का असर सिर्फ विरोध प्रदर्शन तक ही सीमित नहीं था, बल्कि इसने एक स्थायी राजनीतिक बदलाव की नींव रखी है. नई सरकार में अनुभवी और गैर-राजनीतिक चेहरों को मौका मिलना इस बात का संकेत है कि अब देश की बागडोर उन हाथों में जा रही है, जो जनता की समस्याओं को बेहतर ढंग से समझते हैं. यह एक नया अध्याय है, जहां उम्मीद है कि सरकार अब लोगों की आवाज सुनेगी और देश में स्थायित्व लाने का प्रयास करेगी.
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