US Iran Peace Talks Islamabad: मिडल-ईस्ट में पिछले 40 दिनों से जारी भीषण रक्तपात के बीच आज दुनिया की नज़रें पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद (US Iran Islamabad Meeting) पर टिकी हैं. शनिवार को यहां अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐसी ऐतिहासिक वार्ता शुरू होने जा रही है, जो तय करेगी कि क्षेत्र में शांति का सूरज उगेगा या बारूद की गंध और गहरी होगी.
बता दें कि ईरान का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ‘मिनाब 168’ नामक एक भावुक संदेश वाले विमान से इस्लामाबाद पहुँच चुका है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस बैठक को “निर्णायक” करार दिया है, जहाँ दोनों देशों के दिग्गज पहली बार आमने-सामने होंगे.
‘मिनाब 168’ विमान क्यों बना चर्चा का विषय?(Minab 168 Plane)
ईरान ने इस बातचीत (US Iran Islamabad Meeting) के लिए कूटनीति के साथ-साथ संवेदनाओं का भी सहारा लिया है. ईरानी प्रतिनिधिमंडल जिस विशेष विमान से पहुंचा, उसका नाम “मिनाब 168” रखा गया है. यह नाम (Minab 168 Plane)उस ईरानी गर्ल्स स्कूल की याद में रखा गया है, जो 28 फरवरी को युद्ध के पहले दिन मिसाइल हमले का शिकार हुआ था और जिसमें 168 बच्चों व लोगों की जान गई थी.
यह भी बता दें कि संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कालिबाफ ने विमान के भीतर की एक दिल दहला देने वाली तस्वीर साझा की, जिसमें खाली सीटों पर बच्चों की तस्वीरें, स्कूल बैग और फूल रखे हुए थे. उन्होंने दुनिया को संदेश दिया कि वे इस दर्द को भुलाकर शांति की मेज पर नहीं आए हैं.
ट्रंप के 10 प्वाइंट बनाम ईरान के 15 सूत्र
शांति के इस महामंच पर दो अलग-अलग योजनाओं पर चर्चा होनी है, जो इस वार्ता का आधार बनेंगी:
ट्रंप का रुख: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान द्वारा भेजे गए एक 10-सूत्रीय प्रस्ताव को बातचीत का “व्यावहारिक आधार” माना है.
अराघची की योजना: वहीं दूसरी ओर ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक 15-सूत्रीय योजना का प्रस्ताव दिया है, जिसे ट्रंप के डेलिगेशन ने युद्ध समाप्त करने का संभावित जरिया माना है. हालांकि दोनों प्रस्तावों की शर्तें अभी गुप्त रखी गई हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि आर्थिक प्रतिबंधों और सैन्य वापसी जैसे मुद्दों पर अभी भी दोनों देशों के बीच गहरी खाई बनी हुई है.
जेडी वेंस और जेरेड कुशनर संभालेंगे कमान
अमेरिका की ओर से इस वार्ता का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस करेंगे. उनके साथ ट्रंप के भरोसेमंद विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और दामाद व सलाहकार जेरेड कुशनर भी शामिल हैं. कुशनर की मौजूदगी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उनका खाड़ी देशों के साथ पुराना कूटनीतिक अनुभव रहा है.
वहीं ईरान की ओर से विदेश मंत्री डॉ. अराघची, रक्षा परिषद के सचिव और सेंट्रल बैंक के गवर्नर जैसे शक्तिशाली लोग मेज पर मौजूद रहेंगे, जो यह संकेत है कि ईरान इस बार केवल सैन्य ही नहीं बल्कि आर्थिक मोर्चे पर भी ठोस समाधान चाहता है.
सीजफायर की राह में लेबनान संकट बनेगा कांटा?
इस्लामाबाद में चल रही इस शांति वार्ता की सबसे बड़ी चुनौती इजरायल का रुख है. एक तरफ अमेरिका और ईरान बात कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ इजरायल ने लेबनान पर हमले और तेज कर दिए हैं. शुक्रवार को हुए इजरायली हमलों में 300 से अधिक लोगों की जान चली गई.
इजराएल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कर दिया है कि ईरान के साथ होने वाला कोई भी सीजफायर लेबनान पर लागू नहीं होगा. इस विरोधाभास ने शांति वार्ता की सफलता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं, क्योंकि ईरान लेबनान और हिजबुल्लाह के मोर्चे पर भी गारंटी चाहता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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