US media coverage BRICS Summit 2026: अमेरिका के प्रमुख अखबारों ने नई दिल्ली में आयोजित हो रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit 2026) को मौजूदा दौर के सबसे बड़े भू-राजनीतिक मोड़ के तौर पर देखा है. तनावपूर्ण गठबंधनों, क्षेत्रीय युद्धों और वाशिंगटन व बीजिंग के बीच बढ़ती तनातनी के बीच अमेरिकी मीडिया इस बात पर माथापच्ची कर रहा है कि भारत इस वैश्विक मंच का उपयोग कैसे कर रहा है.
‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’, ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ और ‘वाशिंगटन पोस्ट’ जैसी प्रतिष्ठित अमेरिकी मीडिया हाउस की रिपोर्ट्स ने इस समिट को भारत के लिए एक ‘मुश्किल संतुलन’ और कूटनीतिक मास्टरस्ट्रोक बताया है.
‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’: भारत की खुली कूटनीति (NYT BRICS Summit 2026)
‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि इस शिखर सम्मेलन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग में से कौन विकासशील दुनिया (Global South) की अधिक प्रभावशाली आवाज बनकर उभरेगा. अखबार का कहना है कि जहां चीन ब्रिक्स को अमेरिकी ताकत को चुनौती देने के एक मंच के रूप में देखता है,
भारत का रुख बिल्कुल साफ है, भारत चाहता है कि यह समूह इतना बड़ा और खुला रहे कि किसी भी देश को पश्चिमी या पूर्वी गुटों में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर न होना पड़े. सात साल बाद भारत आए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का यह दौरा बेहद अहम है, क्योंकि इसके तुरंत बाद 24 सितंबर को उन्हें व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिलना है.
‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’: भारत-चीन संबंधों में संतुलन (WSJ BRICS Summit 2026)
‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ (WSJ) की रिपोर्ट (तृप्ति लाहिड़ी और ऑस्टिन रैमजी द्वारा) के अनुसार, अमेरिका के साथ भारत और चीन दोनों के रिश्तों में आई अनिश्चितता ने इन दोनों परमाणु-हथियार संपन्न पड़ोसी देशों को तनाव कम करने का एक मौका दिया है.
जेएनयू के चीनी अध्ययन के प्रोफेसर श्रीकांत कोंडापल्ली ने डब्ल्यूएसजे को बताया कि भारत अपनी स्थिति को फिर से संतुलित (Re-balance) करने की कोशिश कर रहा है. अखबार का यह भी मानना है कि सीमा विवाद के अनसुलझे रहने, पाकिस्तान के साथ चीन के संबंधों और हिंद महासागर की सुरक्षा प्रतिस्पर्धा के कारण इस सुधार की सीमाएं तय हैं.
‘वाशिंगटन पोस्ट’: ग्लोबल साउथ की विविधता (WP BRICS Summit 2026)
‘वाशिंगटन पोस्ट’ ने एपी (Associated Press) की रिपोर्ट प्रकाशित करते हुए इस शिखर सम्मेलन को भारत के लिए एक “मुश्किल संतुलन बनाने वाली कवायद” बताया है. रिपोर्ट में रेखांकित किया गया कि पीएम मोदी ने सम्मेलन से पहले रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से अलग-अलग मुलाकात की है.
इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के सीनियर एनालिस्ट प्रवीण डोंथी ने एपी से कहा कि ग्लोबल साउथ कोई एक जैसा एकरंगी ग्रुप नहीं है, इसलिए इसके भीतर के अंतर्विरोधों और क्षेत्रीय युद्धों (जैसे यूक्रेन और मिडिल ईस्ट का संकट) के बीच संतुलन साधना एक बहुत बड़ी चुनौती होगी.
भारत वैश्विक कूटनीति का केंद्र
पश्चिमी मीडिया का यह विश्लेषण इस बात की गवाही देता है कि आज की तारीख में भारत वैश्विक कूटनीति के केंद्र में खड़ा है. रूस और पश्चिम दोनों के साथ संतुलन बनाते हुए भारत ने यह साबित कर दिया है कि वह किसी के दबाव में आए बिना अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर दुनिया की दिशा तय करने की ताकत रखता है.
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