कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने अपने खिलाफ कथित तौर पर एक मादक पेय कंपनी डियाजियो स्कॉटलैंड को अपनी व्हिस्की की ड्यूटी फ्री करवाने को लेकर दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की मांग करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. उन्होंने इसको लेकर याचिका दाखिल की है जिसपर जल्द सुनवाई होने की संभावना है. उनके खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मामला दर्ज किया था.
चिदंबरम ने प्रारंभिक जांच में CBI ने कभी नहीं बुलाया
कार्ति चिदंबरम ने आईपीसी की धारा 120बी के साथ 420 और 471 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 8, 9 और 13(2) के साथ 13(1)(डी) के तहत 1 जनवरी को दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की मांग की है. उन्होंने कहा इस मामले की प्रारंभिक जांच में सीबीआई ने कभी नहीं बुलाया है. उन्हें अपना पक्ष रखने का भी अवसर नहीं दिया है. सात साल की लंबी प्रारंभिक जांच के बावजूद किसी भी लोक सेवक की पहचान नहीं की गई है और न ही दर्ज प्राथमिकी में उसका नाम है. प्राथमिकी दर्ज किए जाने में भी काफी देरी की गई है.
जैसे आरोप वर्ष 2004-2010 के बीच की अवधि का है जबकि प्राथमिकी वर्ष 2025 में यानी 20 साल बाद दर्ज की गई है. उन्होंने यह भी कहा है कि ऐसा कोई आरोप नहीं है कि उन्होंने किसी से रित या अवैध लाभ की मांग की या स्वीकार किया. इसलिए पीसी अधिनियम की धारा 8 और 9 के तहत उनके खिलाफ कोई अपराध नहीं बनता है.
इस महीने की शुरु आत में विशेष सीबीआई अदालत ने सीबीआई को निर्देश दिया था कि 12 जनवरी को देश लौटने पर मामले की जांच में शामिल होने के बाद अगर चिदंबरम की गिरफ्तारी की जरूरत पड़ती है, तो उन्हें तीन दिन पहले लिखित नोटिस दिया जाए. उसने चिदंबरम को भी निर्देश दिया था कि वे भारत लौटने पर जांच में शामिल हों और कानून के अनुसार जब भी जरूरत हो, इस प्रक्रिया में सहयोग करें.
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-भारत एक्सप्रेस
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