प्रतीकात्मक तस्वीर.
दिल्ली के साकेत कोर्ट (Saket Court) ने डकैती के दौरान एक व्यक्ति की गला घोंटकर हत्या के आरोप में जेल में बंद चार आरोपियों को सबूत के आभाव में बरी कर दिया. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने में विफल रहा है. साकेत कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गीतांजलि ने आरोपी शिवम, सुमित, हीरा लाल और मुकीम को बरी किया है.
यह मामला जैतपुर पुलिस थाने का है. 2018 में हत्या, अपहरण और डकैती के तहत चारों आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया गया था. अदालत ने अपने 75 पन्नों के फैसले में कहा अभियोजन पक्ष की कहानी में बहुत सारी कमियां है.
मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी या कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं था
कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष उन परिस्थितियों को स्थापित करने में विफल रहा है जिनमें आरोपियों ने मृतक दीपक की हत्या करने का आरोप लगाया था. अभियोजन पक्ष द्वारा परीक्षित गवाहों की गवाही घटना में आरोपियों की संलिप्तता साबित करने के लिए अपर्याप्त है. अदालत ने कहा कि मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी या कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं था और अभियोजन पक्ष ने मृतक दीपक के पिता रमा शंकर की गवाही पर भरोसा किया.
अभियोजन पक्ष ने यह साबित करने का प्रयास किया है कि मृतक को आखिरी बार आरोपियों के साथ जीवित देखा गया था, जिससे यह अनुमान लगाया गया कि आरोपियों ने उसकी हत्या की है.
हालांकि, अदालत ने कहा कि आखिरी बार साथ देखे जाने का सिद्धांत तब धराशायी हो गया जब पिता ने स्वीकार किया कि उसने आरोपियों को अपने बेटे से मिलते नही देखा है. अभियोजन पक्ष इस दलील पर ध्यान दिया कि मृतक का शव और कथित तौर पर उसका गला घोंटने के लिए इस्तेमाल की गई नायलॉन की रस्सी शंकर की मौजूदगी में बरामद हुई थी.
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-भारत एक्सप्रेस
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