दिल्ली हाई कोर्ट
दिल्ली हाई कोर्ट ने एम्स से उसके पूर्व मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) संजीव चतुर्वेदी की उस याचिका पर जवाब मांगा है, जिसमें उनके खिलाफ चल रही कानूनी लड़ाई में झूठी गवाही देने के आरोप लगाए गए हैं. जस्टिस सी हरि शंकर और जस्टिस अजय दिगपॉल की पीठ ने संजीव चतुर्वेदी की याचिका पर एम्स को नोटिस जारी किया है. याची ने सीआरपीसी की धारा 340 के तहत याचिका दायर की है. अदालत ने एम्स को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.
याचिकाकर्ता ने कहा कि एम्स ने वित्तीय वर्ष 2014-15 के लिए अपनी वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट लिखने के “चैनल” से संबंधित उनकी याचिका के जवाब में 17 अगस्त, 2016 को दाखिल अपने जवाबी हलफनामे में झूठे बयान दिए हैं.
याचिकाकर्ता 2012 से 2014 के बीच एम्स में मुख्य सतर्कता अधिकारी थे और उन्होंने चिकित्सा संस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी. 2016 में अपने कार्यकाल की समाप्ति से पहले अगस्त 2014 में उन्हें पद से मुक्त कर दिया गया था. उनकी याचिका में कहा गया है जानबूझकर गलत बयान देने के लिए प्रतिवादी (एम्स) के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 340 और आईपीसी की धारा 193 के तहत उचित आपराधिक कार्यवाही शुरू की जाए.
याचिका में अदालत से जानबूझकर गलत बयान देने पर अधिकारियों पर जुर्माना लगाने की भी मांग की गई है. चतुर्वेदी एक भारतीय वन सेवा अधिकारी हैं, जिन्हें 2015 में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. मामले की अगली सुनवाई जुलाई में होगी.
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-भारत एक्सप्रेस
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