70 साल की उम्र में भी समाज सेवा की मिसाल पेश कर रहीं मनभर, राजस्थान और अन्य राज्यों की महिलाओं और बालिकाओं को आत्मरक्षा की ट्रेनिंग दे रही हैं. खुद बाल विवाह का शिकार होने वाली मनभर का मानना है कि यह दुनिया आज भी उन महिलाओं और बच्चियों के लिए असुरक्षित है, जिन्हें बचपन में ही दुराचार का सामना करना पड़ता है. उन्होंने यह मिशन इसलिए शुरू किया है, ताकि महिलाओं को आत्मनिर्भर और सुरक्षित बनाया जा सके.
मनभर का संघर्ष और मिशन
मनभर बताती हैं, “मुझे आत्मरक्षा सिखाने में खुशी मिलती है, क्योंकि यह लड़कियों को न केवल आत्मविश्वास देता है, बल्कि बुरी नज़र से बचने की ताकत भी देता है.” वह कहती हैं कि जब तक उनके शरीर में ताकत है, वह लड़कियों को सुरक्षा के तरीके सिखाती रहेंगी.

समाज में बदलाव की दिशा
मनभर का यह मिशन केवल जयपुर और राजस्थान तक सीमित नहीं है. वह कई अन्य राज्यों में भी महिलाओं और बच्चियों को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग दे चुकी हैं. अब तक उन्होंने 20,000 से ज्यादा महिलाओं और बच्चियों को आत्मरक्षा के टिप्स दिए हैं. उन्हें इस काम के लिए कई सरकारी सम्मान भी मिल चुके हैं. मनभर का एक ही उद्देश्य है – समाज में महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल बनाना.
बाल विवाह और आत्मरक्षा पर काम
मनभर का कहना है कि वे बाल विवाह के खिलाफ भी संघर्ष कर रही हैं. उनकी कोशिश है कि कोई लड़की बचपन में ही विवाह के बंधन में न बंधे. इसके लिए वे पूरे राजस्थान और अन्य राज्यों में बाल विवाह विरोधी जागरूकता अभियान चला रही हैं.
8 मार्च – क्यों मनाते हैं महिला दिवस?
महिला दिवस का दिन महिलाओं के संघर्ष और उनकी उपलब्धियों को मान्यता देने के लिए मनाया जाता है. यह दिन समाज में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को पहचानने और समानता की दिशा में कदम बढ़ाने का अवसर है. इस दिन को मनाने का उद्देश्य महिलाओं को उनके अधिकार और सम्मान दिलाना है. मनभर जैसी महिलाएं इस दिशा में अपने कार्यों से प्रेरणा देती हैं.
मनभर का कार्य न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह समाज में बदलाव की दिशा में एक अहम कदम भी है. उनकी तरह कई महिलाएं अपनी आवाज उठा रही हैं और समाज में सुधार ला रही हैं. महिलाओं को आत्मरक्षा सिखाना और उनके लिए सुरक्षित माहौल तैयार करना इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है.
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