डोनाल्ड ट्रम्प
अमेरिका ने भारत पर 2 अप्रैल 2025 से रेसिप्रोकल टैरिफ (प्रतिशोधी कर) लगाने की घोषणा की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 5 मार्च को अमेरिकी संसद के संयुक्त सत्र में इस फैसले का ऐलान किया। यह निर्णय ‘आंख के बदले आंख’ नीति के तहत लिया गया है, जिसके तहत अमेरिका उतना ही टैरिफ लगाएगा जितना भारत अमेरिकी उत्पादों पर लगाता है। इस कदम से भारतीय निर्यातकों को सालाना 7 बिलियन डॉलर (करीब 61 हजार करोड़ रुपए) का नुकसान होने की आशंका है।
क्या है टैरिफ और इसका प्रभाव?
टैरिफ किसी भी देश द्वारा विदेशी उत्पादों पर लगाया जाने वाला शुल्क होता है, जिससे उन उत्पादों की कीमत बढ़ जाती है। उदाहरण के लिए, अगर टेस्ला का साइबर ट्रक अमेरिका में 90 लाख रुपये का है और भारत 100% टैरिफ लगाता है, तो इसकी कीमत 2 करोड़ रुपये हो जाएगी। इसी तरह, अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर अधिक शुल्क लगाने से उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित होगी।
रेसिप्रोकल टैरिफ का मतलब
रेसिप्रोकल टैरिफ का अर्थ है व्यापार संतुलन बनाए रखना। अगर भारत किसी अमेरिकी उत्पाद पर 100% टैरिफ लगाता है, तो अमेरिका भी भारतीय उत्पादों पर उतना ही टैरिफ लगाएगा। ट्रम्प ने इसी नीति को अपनाने का फैसला किया है ताकि अमेरिकी कंपनियों को भारत में व्यापार करने में आसानी हो और घरेलू उत्पादकों को फायदा मिले।
ट्रम्प ने ऐसा फैसला क्यों लिया?
डोनाल्ड ट्रम्प अपने आर्थिक एजेंडे में व्यापार घाटा कम करने और घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने पर जोर दे रहे हैं। 2023 में अमेरिका को चीन, मैक्सिको और कनाडा से भारी व्यापार घाटा हुआ, जिसमें चीन का हिस्सा 30.2%, मैक्सिको का 19% और कनाडा का 14.5% था। अमेरिका पहले ही चीन, मेक्सिको और कनाडा पर टैरिफ बढ़ा चुका है, और अब भारत की बारी है।
भारत पर क्या असर होगा?
1. निर्यात महंगा होगा – भारत के फूड प्रोडक्ट्स, टेक्सटाइल, इलेक्ट्रिकल मशीनरी, जेम्स एंड ज्वेलरी, फार्मास्यूटिकल्स और ऑटोमोबाइल सेक्टर पर असर पड़ेगा।
2. ट्रेड सरप्लस घटेगा – अमेरिका अभी भारत से सस्ते उत्पाद खरीदता है, लेकिन टैरिफ बढ़ने से यह लाभ कम हो सकता है।
3. अमेरिकी सामान सस्ता होगा – भारत अगर अमेरिकी टैरिफ का जवाब टैरिफ घटाकर देता है, तो अमेरिकी उत्पाद सस्ते हो जाएंगे, जिससे उनका आयात बढ़ सकता है।
4. रुपया कमजोर हो सकता है – ज्यादा आयात से डॉलर की मांग बढ़ेगी, जिससे रुपया कमजोर हो सकता है।
5. एफडीआई में वृद्धि हो सकती है – अमेरिकी कंपनियां भारत में निर्माण यूनिट लगाने पर विचार कर सकती हैं।
कौन से सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे?
अमेरिका भारत को हर साल 42 बिलियन डॉलर का सामान बेचता है। भारत में लकड़ी, मशीनरी, फूटवियर, ट्रांसपोर्ट इक्विपमेंट और फूड प्रोडक्ट्स पर 7% से 68% तक टैरिफ है। अमेरिका का कृषि उत्पादों पर टैरिफ सिर्फ 5% है, जबकि भारत का 39%। अगर अमेरिका कृषि उत्पादों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाता है, तो भारतीय कृषि और फूड सेक्टर पर बड़ा असर पड़ेगा।
क्या अमेरिकी सामान सस्ता होगा?
नोमुरा की रिपोर्ट के अनुसार, भारत 30 से अधिक अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ घटा सकता है, जिससे ये उत्पाद भारतीय बाजार में सस्ते हो सकते हैं। भारत पहले ही कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़ा और मोटरसाइकिल उत्पादों पर आयात शुल्क घटा चुका है। सरकार अब लग्जरी व्हीकल्स, सोलर सेल्स और कैमिकल्स पर और कटौती पर विचार कर रही है।
2 अप्रैल से ही टैरिफ क्यों बढ़ा?
ट्रम्प ने पहले 1 अप्रैल से यह फैसला लागू करने का सोचा था, लेकिन ‘अप्रैल फूल’ वाले दिन इसे मजाक समझे जाने की आशंका थी। इसलिए 2 अप्रैल से इसे लागू करने का फैसला लिया गया।
ट्रम्प की टैरिफ नीति भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर गहरा असर डाल सकती है। जहां भारत को 61 हजार करोड़ रुपये के नुकसान की संभावना है, वहीं अमेरिकी उत्पाद भारतीय बाजार में सस्ते हो सकते हैं। अब देखना यह होगा कि भारत सरकार इस फैसले पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या रणनीति अपनाती है।
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-भारत एक्सप्रेस
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