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दिल्ली हाईकोर्ट ने गांवों में LPG कनेक्शन की मांग वाली जनहित याचिका खारिज की

दिल्ली हाईकोर्ट ने गांवों में एलपीजी कनेक्शन की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका को खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि इस तरह का अधिकार किस कानून के तहत मांगा जा सकता है, यह स्पष्ट नहीं है.

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दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली के गांवों में एलपीजी कनेक्शन की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका को खारिज कर दिया है. मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की पीठ ने कहा कि आप ऐसा अधिकार कैसे मांग सकते है? यह अधिकार कहां से आ रहा है? कौन सा प्रावधान है?

कोर्ट ने कहा कि संसद में दिया गया हर बयान कानून बन जाता है. कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि अगर याचिकाकर्ता असंतुष्ट महसूस करता है, तो वो उपलब्ध कानूनी सहायता लेने की स्वतंत्रता होगी.

याचिकाकर्ता को कानूनी सहायता लेने की सलाह

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर पेश वकील ने कहा कि संसद में सरकार ने कहा कि उन्हें एलपीजी कनेक्शन देने का अधिकार हैं. मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह कोर्ट भी चाहेगा कि सबको एलपीजी ही नहीं हर तरह की सुविधा मिले. समाज में इतनी सारी बीमारियां हैं कि हम हर दिन देखते हैं. लेकिन हमारे हाथ में कोई जादू की छड़ी नहीं है.

वही जस्टिस गेडेला ने कहा कि हम तकनीकी विशेषज्ञ नहीं हैं. उन्हें सुरक्षा पहलुओं पर ध्यान देना होगा. हम कोई नहीं हैं. कृपया उनके समक्ष अपना प्रतिनिधित्व दर्ज करें. न तो आप और न ही हम व्यवहार्यता परीक्षण करने में सक्षम हैं. कोर्ट ने कहा कि प्राथमिक शिकायत दिल्ली के सभी गांवों में पाइप प्राकृतिक गैस सुविधा की उपलब्धता के संबंध में है. याचिका में प्रत्येक प्रार्थना अलग-अलग और अलग-अलग कारणों से उत्पन्न होती है. ऐसी जनहित याचिका पर सुनवाई करना मुश्किल हो जाता है.

मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि याचिका में प्रत्येक कारण को अलग-अलग लिया जाना चाहिए. अगर याचिकाकर्ता को शिकायत है तो उसे संबंधित अधिकारी के ध्यान में लाया जाना चाहिए. जहां तक प्राथमिक मुद्दे का सवाल है, हम प्रावधान करते हैं कि उसे संबंधित अधिकारियों के समक्ष अपना प्रतिनिधित्व करना चाहिए.

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-भारत एक्सप्रेस 



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