मैं आपको एक ऐसी घटना से रूबरू कराने जा रहा हूं जो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. लेकिन यह बिल्कुल हकीकत है. इस घटना ने सबको चौंका दिया है. ये घटना बीड जिले की है, जो 7 जुलाई की उस अंधेरी काली रात की बात है, जिसके अंधेरे में चमत्कार छुपी हुई थी. एक बुजुर्ग महिला अपने नवजात पोते को आखिरी बार देखने पहुंची थी. इस बच्चे को जन्म के कुछ देर बाद ही मृत घोषित कर दिया गया था. परिवार दुख में डूबा हुआ था और बच्चे को दफनाने की तैयारियां शुरू हो चुकी थीं. लेकिन दादी अपने पोते का चेहरा देखने के लिए बेचैन थी.
चमत्कार से ज्यादा कुछ नहीं
बेमिसाल प्रेम और आंसुओं से भरी वो घड़ी जब एक दादी अपने नवजात पोते को आख़िरी बार देखना चाहती थी. अस्पताल ने बच्चे को जन्म के कुछ देर बाद मृत घोषित कर दिया था. पूरे परिवार में मातम पसरा था. लेकिन दादी तो दादी होती है. दादी का दिल मानने को तैयार नहीं था. वो बार-बार कहती रहीं कि उसका चेहरा तो दिखाओ, बस एक बार चेहरा तो दिखाओ.
जब सफेद कपड़ा हटाया गया और दादी ने झुकर कर पोते को देखा तो एक अनकहा चमत्कार घटा. जिस मासूम बच्चे को सब लोग मृत समझ रहे थे वो अचानक हिलने लगा. दादी ठिठक गईं और पूरे माहौल में जैसे कोई बिजली-सी कौंध गई.
कुछ पल के लिए सब स्तब्ध हो गए थे. वहां मौजूद सभी लोग ये सोचने पर मजबूर हो गए कि क्या यह सपना देख रहे है? लेकिन बच्चे ने हल्की सांस ली, उसकी छोटी सी उंगली हिली और मानो समय ठहर गया हो. वहां पर मौजूद सभी लोग अस्पताल की ओर भागे. जिसके बाद डॉक्टरों ने कहा कि ये चमत्कार ही है कि बच्चा ज़िंदा है. दादी की आंखों में उस समय सिर्फ आँसू नहीं थे उनकी आंखों में ममता की जीत थी और भरोसे की ताकत थी. उन्होंने उस नन्हे जीवन को अपनी आस्था से फिर से जगा दिया था.
-भारत एक्सप्रेस
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