Sarzameen Review: काजोल, पृथ्वीराज सुकुमारन और इब्राहिम अली खान की फिल्म ‘सरजमीं’ (Sarzameen) OTT प्लेटफार्म JioCinema पर रिलीज हो गई है. इस फिल्म को कायोज़े ईरानी ने डायरेक्ट किया है, जबकि इसका धर्मा प्रोडक्शन्स और स्टार स्टूडियोज ने मिलकर इसे प्रोड्यूस किया है. अगर आप इस फिल्म को देखना चाह रहे हैं, तो पहले इसका रिव्यू जरूर पढ़ें. (Sarzameen Review) जानिए कैसी है इसकी कहानी और क्या इब्राहिम ने अपने एक्टिंग से उम्मीदों पर खरा उतरने की कोशिश की है.
फिल्म की कहानी: एक बाप-बेटे के रिश्ते की…
फिल्म की कहानी कर्नल विजय मेनन (पृथ्वीराज सुकुमारन) और उनके बेटे हरमन (इब्राहिम अली खान) के रिश्ते की है. विजय को अपने बेटे से नफरत है क्योंकि वह उसे कमजोर और डरपोक मानता है. हरमन अपने पिता के प्यार को तरसता रहता है, लेकिन जब यह दूरी और भी गहरी हो जाती है, तो वह ऐसा रास्ता पकड़ लेता है जो उसके परिवार और देश दोनों के खिलाफ जाता है.
वहीं इस फिल्म में मां (काजोल) दोनों के बीच के रिश्ते को सुधारने की कोशिश में लगी रहती हैं, लेकिन हालात और उलझते जाते हैं. एक मिशन के दौरान विजय दो आतंकियों को पकड़ता है, जिसके जवाब में आतंकवादी हरमन को अगवा कर लेते हैं. इसके बाद शुरू होती है भावनाओं और रिश्तों की एक नई जंग…
फिल्म में इब्राहिम अली खान ने पहले से बेहतर किया?
पृथ्वीराज सुकुमारन ने पिता की भूमिका में शानदार काम किया है. उनका गुस्सा और अंदरूनी टूटन दोनों ही चेहरे पर साफ नजर आते हैं. वहीं काजोल अपने सीमित स्क्रीन टाइम में ठीक-ठाक लगीं. इब्राहिम अली खान की बात करें तो अपनी चॉकलेटी हीरो वाली इमेज से हटकर एक गंभीर किरदार निभाने की कोशिश की है. हालांकि, डायलॉग डिलीवरी और एक्सप्रेशंस में अभी काफी बेहतर है.
फिल्म की खासियतें (Sarzameen Review)
‘सरज़मीन’ की सबसे बड़ी ताकत इसकी लोकेशन है कश्मीर की वादियों को बेहद खूबसूरती से कैमरे में कैद किया गया है. फिल्म में देशभक्ति की भावना के साथ पारिवारिक रिश्तों की गर्माहट भी दिखाई गई है. कुछ डायलॉग्स वाकई में असरदार हैं, जैसे—”मेरे लिए सबसे जरूरी है सरज़मीन की हिफाज़त, चाहे इसके लिए मुझे अपने बेटे का भी सामना क्यों न करना पड़े.”
कहानी की कमजोरियां (Sarzameen Review)
इस फिल्म की खामियों की बात करें तो इस फिल्म की कहानी में कुछ नया देखने को नहीं मिला है. कई सीन देखकर ‘मिशन कश्मीर’ और ‘फिजा’ जैसी फिल्मों की याद आई है. कई जगह लॉजिक की कमी है और ऐसे सीन भी दिखाए गए है जो वाकई में हकीकत से बहुत दूर लगते हैं. काजोल, पृथ्वीराज और इब्राहिम के किरदारों के बीच भावनात्मक जुड़ाव की कमी साफ है. वहीं कुछ एक्शन सीन्स और वीएफएक्स बनावटी लगते हैं, जैसे डैम ब्लास्ट वाला सीन महसूस होते हैं.
देखें या छोड़ दें?
अगर आप इब्राहिम अली खान की डेब्यू परफॉर्मेंस देखना चाहते हैं और पारिवारिक-देशभक्ति ड्रामा में रुचि रखते हैं, तो एक बार देख सकते हैं. लेकिन अगर आप ‘राज़ी’ या ‘उरी’ जैसी मजबूत कहानी और दमदार ट्रीटमेंट की उम्मीद कर रहे हैं, तो यह फिल्म शायद निराश कर सकती है.
#Sarzameen had a solid premise but failed to deliver. Weak screenplay and direction let it down. Prithvi, Kajol & the rest of the cast did well, but there was no real emotional connect. Overall, a mid watch with no standout moments.
AVERAGE pic.twitter.com/sKHJmAfeno
— K A L K I (@iamkalki_13) July 25, 2025
कुछ दर्शकों को फिल्म का इमोशनल एंगल पसंद आया. एक यूज़र ने सोशल मीडिया पर लिखा कि, ‘सरज़मीन एक इमोशनल रोलरकोस्टर है. क्लाइमैक्स में जो ट्विस्ट आता है, वो वाकई चौंकाता है. पृथ्वीराज और काजोल दमदार हैं, और इब्राहिम ने उम्मीद से बेहतर काम किया.’ वहीं इस फिल्म को ओवरआल ‘वन टाइम वॉच’ के साथ बताया और 3/5 स्टार दिए हैं.
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