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Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव की सरगर्मियों के बीच, चुनावी रणनीतिकार से कार्यकर्ता बने जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) ने एक बार फिर चुनावी माहौल को गरमा दिया है. नामांकन का दौर शुरू होने के बावजूद, INDIA गठबंधन में सीट बंटवारे और सीएम फेस को लेकर चल रही अनिश्चितता पर सवाल उठाते हुए, PK ने एक चौंकाने वाली भविष्यवाणी की है. अब उनके भविष्यवाणी की चर्चा पूरे बिहार के साथ देश में होने लगी है.
PK का यह विस्फोटक दावा ऐसे समय में आया है जब जन सुराज ने सबसे पहले अपने प्रत्याशियों की लिस्ट जारी करके मैदान में मजबूत दावेदारी पेश कर दी है, जिसमें प्रशासनिक अधिकारी और भोजपुरी कलाकार जैसे चेहरे शामिल हैं.
Bihar Election का ‘रियल किंगमेकर’?
मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए प्रशांत किशोर ने साफ तौर पर कहा है कि इस बार महागठबंधन (INDIA गठबंधन) तीसरे स्थान पर रहने वाला है. बिहार की असली चुनावी लड़ाई NDA और उनकी अपनी पार्टी जन सुराज के बीच है. जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने महागठबंधन दलों के बीच सीट बटवारे पर कहा कि INDIA गठबंधन से जाकर पूछिए. जहां तक बात असली लड़ाई की है तो लड़ाई NDA और जनसुराज में है.
#WATCH | पटना: जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने महागठबंधन दलों के बीच सीट बटवारे पर कहा, “INDIA गठबंधन से जाकर पूछिए।”
उन्होंने आगे कहा, “…INDIA गठबंधन इस बार तीसरे स्थान पर रहने वाला है। लड़ाई NDA और जनसुराज में है।” pic.twitter.com/13GnCxtr3I
— ANI_HindiNews (@AHindinews) October 18, 2025
प्रशांत किशोर के दावे की मानें तो वह खुद का पार्टी को सरकार बनाते तो नहीं देख रहे हैं. हालांकि, उनके बयान से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि वह तेजस्वी और चिराग पासवान के किंग मेकर की तरह नहीं देख रहे हैं. बल्कि, वह खुद को और अपनी जनसुराज को रिजल्ट के बाद के लिए अभी से बतौर ‘रियल किंगमेकर’ प्रजेंट कर रहे हैं.
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थ्रिल पैदा करता प्रशांत किशोर का दावा
प्रशांत किशोर का यह सीधा और आक्रामक दावा कि महागठबंधन बिहार चुनाव में तीसरे स्थान पर रहेगा और असली टक्कर NDA तथा जन सुराज के बीच है, बिहार की राजनीति में एक नया थ्रिल पैदा करता है. INDIA गठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर चल रही असमंजस, खासकर कांग्रेस और मुकेश सहनी की वीआईपी के बीच फंसे पेंच, PK के इस दावे को बल देते हैं. PK की पार्टी जन सुराज द्वारा प्रशासनिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं को मैदान में उतारना यह दिखाता है कि वह चुनावी लड़ाई को व्यक्तिगत साख और जमीनी संगठन के आधार पर लड़ रहे हैं.
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