Malayalam Actor Sreenivasan: साउथ फिल्म इंडस्ट्री से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है. मलयालम सिनेमा के स्तंभ माने जाने वाले मशहूर अभिनेता, लेखक और फिल्म निर्माता श्रीनिवासन अब हमारे बीच नहीं रहे. 69 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली. उनके निधन की खबर मिलते ही पूरी फिल्म इंडस्ट्री और उनके चाहने वालों के बीच शोक की लहर दौड़ गई है. करीब चार दशकों तक अपनी अदाकारी और कलम के जादू से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले श्रीनिवासन का जाना सिनेमा जगत के लिए एक ऐसी क्षति है, जिसकी भरपाई नामुमकिन है.
अभिनय के साथ-साथ लेखन और निर्देशन के भी थे उस्ताद
श्रीनिवासन केवल एक अभिनेता नहीं थे, बल्कि वह एक ‘कम्प्लीट फिल्म मेकर’ थे. केरल के कन्नूर (थलस्सेरी) में जन्मे श्रीनिवासन ने अपने करियर में 225 से ज्यादा फिल्मों में काम किया. उन्होंने पर्दे पर सिर्फ एक्टिंग ही नहीं की, बल्कि ऐसी कहानियां लिखीं जो समाज का आईना बनीं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक निर्देशक के तौर पर की थी और बाद में एक्टिंग की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई.
उनकी निर्देशित फिल्म ‘वडक्कुनोक्कियंथ्रम’ के लिए उन्हें केरल राज्य फिल्म पुरस्कार मिला था, वहीं ‘चिंताविष्टय्या श्यामला’ ने नेशनल अवॉर्ड जीतकर इतिहास रच दिया था. उनकी फिल्मों की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वे आम आदमी की जिंदगी और उसकी समस्याओं को बहुत ही सहज और मजाकिया अंदाज में पेश करते थे.
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क्लासिक फिल्मों का खजाना छोड़ गए पीछे
श्रीनिवासन की लिखी और अभिनीत फिल्में आज भी मलयालम सिनेमा की ‘क्लासिक’ लिस्ट में शुमार हैं. ‘सनमानसुल्लावरक्कु समाधानम’, ‘नादोदिकट्टू’, ‘संदेसम’ और ‘उदयानु थारम’ जैसी फिल्मों ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया था. उनकी जोड़ी मोहनलाल और ममूटी जैसे सुपरस्टार्स के साथ खूब जमती थी. उनकी लिखी कहानियों में व्यंग्य और सच्चाई का ऐसा मेल होता था कि दर्शक खुद को उनसे जोड़ लेते थे.
सम्मानों से भरा रहा फिल्मी सफर
उनके शानदार योगदान के लिए उन्हें कई बड़े पुरस्कारों से नवाजा गया. श्रीनिवासन के खाते में एक नेशनल फिल्म अवॉर्ड, दो फिल्मफेयर साउथ अवॉर्ड्स और छह केरल राज्य फिल्म पुरस्कार शामिल थे. उनके जाने से न केवल उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूटा है, बल्कि उन लाखों फैंस का दिल भी टूट गया है जो उनकी सादगी और प्रतिभा के कायल थे.
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-भारत एक्सप्रेस
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