Rajasthan News: राजस्थान सरकार ने कोटा जिले की दिगोद तहसील के मोहम्मदपुरा गांव का नाम बदलकर मोहनपुरा कर दिया है और इसके लिए एक आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया है.
नोटिफिकेशन के अनुसार, अब यह गांव सभी सरकारी रिकॉर्ड में, जैसे कि रेवेन्यू दस्तावेज़, स्कूल और प्रशासनिक कार्यालय, मोहनपुरा के नाम से दर्ज होगा. गांव में लगभग साढ़े छह दर्जन घर हैं और यहां पूरी तरह से हिंदू समुदाय के लोग रहते हैं, कोई भी मुस्लिम परिवार यहां नहीं रहता.
रसूलपुर गांव का नाम बदला
पहले, गांव की वास्तविक आबादी के बावजूद, आधिकारिक दस्तावेज़ों में इसका नाम मोहम्मदपुरा दर्ज था. यह ध्यान देने योग्य है कि हाल ही में राजस्थान सरकार ने कैथून इलाके के खेड़ा रसूलपुर गांव का नाम बदलकर खेड़ारामपुर कर दिया था. यह गांवों के नाम बदलने के एक बड़े ट्रेंड को दिखाता है.
स्थानीय लोगों के अनुसार, रियासत काल में गांव का नाम एक मोहम्मद नाम के पुलिस चौकी इंचार्ज के नाम पर मोहम्मदपुरा रखा गया था. बाद में यह नाम सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज किया गया और दशकों तक ऐसा ही चला.
लंबे समय नाम बदलने की चल रही थी मांग
मदनपुरा पंचायत के एडमिनिस्ट्रेटर मूलचंद गुर्जर ने बताया कि गांव वाले लंबे समय से गांव का नाम बदलने की मांग कर रहे थे. मोहम्मदपुरा (अब मोहनपुरा) पिपलादा विधानसभा क्षेत्र में आता है और चंबल नदी के किनारे, दिगोद तहसील मुख्यालय से लगभग 46 किलोमीटर दूर स्थित है.
नायब तहसीलदार हेमराज नागर ने बताया कि गांव के ज्यादातर लोग खेती करते हैं. गांव वालों ने नाम बदलने के लिए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक ज्ञापन भी सौंपा था. उनके प्रयासों के बाद, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने प्रस्ताव को मंज़ूरी दी और इसके बाद राज्य सरकार ने नोटिफिकेशन जारी किया.
नाम बदलने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू
गांव वालों ने स्पीकर का आभार जताया. अधिकारियों ने बताया कि जिला कलेक्टर के निर्देश मिलने के बाद नाम बदलने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू होगी. राजस्थान सरकार द्वारा पिपलादा विधानसभा क्षेत्र में मोहम्मदपुरा गांव का नाम आधिकारिक रूप से मोहनपुरा करने का आदेश राज्य राजस्व विभाग के उप सचिव हरि सिंह मीणा ने जारी किया, जिससे सरकारी रिकॉर्ड में गांव का नाम औपचारिक रूप से बदल गया.
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यह बदलाव भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग से मिले पत्र के आधार पर, उचित प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद किया गया. दिगोद तहसीलदार प्रीतम कुमारी मीणा ने बताया कि गांव वालों के अनुरोध पर नाम बदलने की प्रक्रिया शुरू की गई थी.
उन्होंने कहा कि गांव वालों ने सरपंच मूलचंद गुर्जर के साथ मिलकर नाम बदलने के लिए एक लिखित आवेदन दिया था. इस आवेदन में सरपंच के ऑफिशियल लेटरहेड पर एक पत्र भी शामिल था, जिस पर सभी गांव वालों के हस्ताक्षर थे.
-भारत एक्सप्रेस
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