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गणतंत्र दिवस पर भारत ने बिछाया था पाकिस्तान के लिए ‘रेड कार्पेट’, 90 दिन बाद हो गई थी जंग

Republic Day History: भारत ने 1955 और 1965 में पाकिस्तान के नेताओं को गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि बनाया था. 1965 में मेहमाननवाजी के 3 महीने बाद ही युद्ध शुरू हो गया था. जानिए 1955 और 1965 में किसे मेहमान के रूप में बुलाया गया था.

When India Invited Pakistan as Republic Day Chief Guest

Republic Day History: आज जब भारत अपना 77वां गणतंत्र दिवस (Republic Day 2026) मना रहा है, तो राजपथ (कर्तव्य पथ) पर मुख्य अतिथि के रूप में यूरोपीय संघ (EU) के शीर्ष नेता एंटोनियो कोस्टा और उर्सुला वॉन डेर लेयेन मौजूद हैं. यह भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत और आर्थिक साझेदारी का प्रतीक है. हर साल ही दुनिया का कोई बड़ा नेता इस मौके पर भारत आता है हिदुस्तान का शौर्य देखता है. लेकिन, गणतंत्र दिवस के 77 साल के इतिहास के पन्ने पलटें, तो एक ऐसा अध्याय भी मिलता है, जिस पर आज यकीन करना मुश्किल है.

क्या आप जानते हैं कि भारत ने अपने इस सबसे बड़े राष्ट्रीय पर्व पर अपने धुर-विरोधी पड़ोसी पाकिस्तान को एक नहीं, बल्कि दो बार मुख्य अतिथि बनाया था? आइये इतिहास के पन्ने पलटते हुए देखें कब और कौन सा पाकिस्तानी नेता भारत के गणतंत्र दिवस उत्सव पर मेहमान बनकर आया.

साल 1955 में मलिक गुलाम मोहम्मद (Republic Day Chief Guest)

1955 में पहली बार पाकिस्तानी गवर्नर बने मेहमान आजादी और बंटवारे के जख्म अभी ताज़ा ही थे, लेकिन भारत ने दरियादिली दिखाते हुए 1955 (5वें गणतंत्र दिवस) में पाकिस्तान के तत्कालीन गवर्नर जनरल मलिक गुलाम मोहम्मद (Malik Ghulam Muhammad) को मुख्य अतिथि के रूप में न्योता दिया.

मलिक गुलाम मोहम्मद अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के छात्र रह चुके थे और उनका भारत से पुराना नाता था. भारत को उम्मीद थी कि इस ‘पर्सनल कनेक्शन’ से रिश्तों में जमी बर्फ पिघलेगी.

साल 1965 में मंत्री राना अब्दुल हामिद (Pakistan as Republic Day Chief Guest)

1965 में भारत ने रिश्तों को सुधारने की एक और कोशिश 10 साल बाद की. 1965 में 15वें गणतंत्र दिवस पर पाकिस्तान के तत्कालीन कृषि एवं खाद्य मंत्री राना अब्दुल हामिद (Rana Abdul Hamid) को मुख्य अतिथि बनाया गया. यह इतिहास का सबसे बड़ा विरोधाभास साबित हुआ. जनवरी में जिस देश के मंत्री का भारत ने फूलों से स्वागत किया, उसी पाकिस्तान ने ठीक 3 महीने बाद (अप्रैल 1965) भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया.

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‘हाथ मिलाना’ और ‘हथियार उठाना’

इस घटना ने भारत को गहरा सबक दिया. इसके बाद गणतंत्र दिवस पर पाकिस्तानी नेताओं को बुलाने का सिलसिला हमेशा के लिए थम गया. आज की तस्वीर आज 2026 में हालात बिल्कुल अलग हैं. एक तरफ भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत बंद है, तो दूसरी तरफ भारत EU के साथ बड़े आर्थिक समझौतों की ओर बढ़ रहा है. 1965 की वह गलती भारत की कूटनीति के लिए एक कड़वी याद बनकर रह गई है.



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