Bharat Express DD Free Dish

UGC के नए नियमों पर मायावती का आया रिएक्शन! बोलीं-‘सामान्य वर्ग का विरोध अनुचित, लेकिन व्यापक विचार-विमर्श जरूरी’

UGC New Rules Reaction Mayawati: UGC के नए समता नियमों पर BSP प्रमुख मायावती ने समर्थन जताया है. उन्होंने कहा कि विरोध अनुचित है, लेकिन लागू करने से पहले व्यापक विचार-विमर्श जरूरी था.

UGC New Rules Reaction Mayawati: बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जारी ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्द्धन हेतु विनियम, 2026’ का समर्थन किया है. उन्होंने बुधवार को ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिवादी भेदभाव को खत्म करने के लिए बनाए गए इन नियमों का विरोध केवल कुछ जातिवादी मानसिकता वाले सामान्य वर्ग के लोग कर रहे हैं. मायावती ने इसे बिल्कुल भी उचित नहीं बताया. साथ ही उन्होंने आगाह किया कि ऐसे नियमों को लागू करने से पहले सभी पक्षों को विश्वास में लेना चाहिए था, ताकि सामाजिक तनाव न पैदा हो.

नए UGC के रेग्युलेशन में क्या?

13 जनवरी 2026 को प्रकाशित इन UGC नियमों के तहत सरकारी कॉलेजों और निजी विश्वविद्यालयों में ‘समता समिति’ बनाना अनिवार्य किया गया है. इन समितियों के जरिए अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्रों की शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाएगा. नियमों में हेल्पलाइन नंबर, निगरानी दल और शिकायत निवारण तंत्र की स्थापना पर जोर दिया गया है. उद्देश्य स्पष्ट है कि उच्च शिक्षा में जाति आधारित भेदभाव को पूरी तरह खत्म करना और समान अवसर प्रदान करना.

UGC पर मायावती क्या बोलीं?

मायावती ने अपने पोस्ट में लिखा, “केवल जातिवादी मानसिकता वाले सामान्य वर्ग के लोग ही इन प्रावधानों का विरोध कर रहे हैं। इसे भेदभाव या षड्यंत्र मानना कतई उचित नहीं है. साथ ही उन्होंने दलित और पिछड़े वर्ग के लोगों से अपील की कि वे स्वार्थी और बिकाऊ नेताओं के भड़काऊ बयानों के बहकावे में न आएं. ऐसे नेता आए दिन घिनौनी राजनीति करते रहते हैं. बसपा प्रमुख ने कहा कि दलित-पिछड़े वर्ग के लोगों को सावधान रहना चाहिए और इन नियमों को सकारात्मक रूप से देखना चाहिए.

 

हालांकि मायावती ने नियमों के पक्ष में खड़े होने के साथ एक महत्वपूर्ण सुझाव भी दिया. उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील नियमों को लागू करने से पहले सभी पक्षों के साथ व्यापक विचार-विमर्श होना चाहिए था. इससे सामाजिक तनाव पैदा होने से बचा जा सकता था। सरकारों और संस्थानों को इस ओर विशेष ध्यान देना चाहिए.

Also Follow Bharat Express on Youtube

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read