Bharat Express DD Free Dish
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital

‘छात्रों के आगे पूरा करियर’, कोर्ट ने JNU के 14 छात्रों को दी जमानत; UGC विरोध प्रदर्शन में हुए थे गिरफ्तार

UGC के नए नियमों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे JNU के 14 छात्रों को पटियाला हाउस कोर्ट से जमानत मिल गई है. रिहा होने वालों में जेएनयू छात्रसंघ की अध्यक्ष अदिति मिश्रा समेत अन्य पदाधिकारी शामिल हैं.

Edited by Sahil Singh

यूजीसी (UGC) के नए नियमों और जेएनयू (JNU) के कुलपति के दौरा की गई जातिवादी टिप्पणी के चलते छात्रओं ने प्रदर्शन किया था. अब इस मामले में बड़ी राहत खबर समाने आई है. पटियाल हाउस कोर्ट ने 14 छात्रों को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है. रिहा किए गए छात्रों में जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष अदिति मिश्रा, उपाध्यक्ष गोपिका के बाबू, संयुक्त सचिव दानिश अली, पूर्व अध्यक्ष नीतीश कुमार और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा सहित अन्य लोग शामिल है.

जानिए पूरा मामला

कोर्ट ने 27 फरवरी को सभी को 25000-25000 हजार रुपए के निजी मुचलके पर जमानत जमानत दे दिया था. लेकिन जमानत की राशि नही भरने और आरोपियों के स्थायी पता के सत्यापन के लिए 13 मार्च तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि पुलिसकर्मियों पर हमला करना एक गंभीर अपराध है, लेकिन आरोपी छात्र हैं जिनके आगे उनका पूरा कैरियर पड़ा है.

हालांकि कोर्ट ने इस बात पर भी विचार किया कि इन अपराधों के लिए अधिकतम पांच साल की सजा का प्रावधान है और आरोपी छात्र हैं, जिनका कोई आदतन अपराध का रिकॉर्ड नहीं है.

छात्राओं का शांतिपूर्ण प्रदर्शन- याचिककर्ताओं के वकील

दिल्ली पुलिस ने यह मामला वसंत कुंज नॉर्थ पुलिस स्टेशन में दर्ज किया था. पुलिस के अनुसार प्रदर्शनकारी छात्रों ने कथित तौर पर प्रदर्शन के दौरान बैरिकेट तोड़ दिए थे. याचिककर्ताओं की ओर से पेश वकील ने जमानत याचिका पर बहस के दौरान कहा था कि छात्रों के खिलाफ कोई विशिष्ट आरोप नहीं हैं. उन्होंने कहा था कि वे शिक्षित व्यक्ति हैं और यूजीसी के नियमों और विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा की गई कुछ टिप्पणियों के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे थे.

आरोपियों की ओर से पेश वकील ने अदालत में कहा था कि सभी आरोपी जांच में सहयोग करने के लिए तैयार है और इस संबंध में वे अदालत को लिखित आश्वासन देने को भी तैयार है.

प्रदर्शन के आड़ में हिंसा हुई- वकील

पुलिस ने अदालत को बताया कि करीब 300 लोगों का मार्च बिना अनुमति के शिक्षा मंत्रालय तक मार्च निकालने जा रहे थे. इस दौरान जब पुलिस ने बैरिकेडिंग लगा कर जब उन्हें रोकने की कोशिश की, तो आरोपियों ने पुलिस के साथ धक्का मुक्की शुरू कर दी. जिससे कई पुलिसकर्मियों को चोटे आई. इस घटना में 27 पुलिसकर्मी घायल हुए थे.

दिल्ली पुलिस की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि यह शांति पूर्वक प्रदर्शन नही था बल्कि प्रदर्शनकारियों द्वारा हिंसा की गई. दिल्ली पुलिस के मुताबिक छात्रों की पुलिसकर्मियों के साथ झड़प हुई, जिसमें पुलिस अधिकारी भी घायल हुए. पुलिस ने कहा कि आरोपी पहले भी कई मौकों पर प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग कर चुके हैं और इस संबंध में पहले भी चार अलग-अलग एफआईआर (FIR) दर्ज की जा चुकी है.


ये भी पढ़ें: भारतीय तटरक्षक बल की सेवानिवृत्त आयु को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक


यह मामला तब शुरू हुआ, जब जेएनयू के कुलपति ने जातिवादी टिप्पणियां की. साथ ही यूनिवर्सिटी के कोष में कटौती, पदाधिकारियों के निष्कासन और रोहित एक्ट के साथ संशोधित यूजीसी नियम को लागू करने की मांग को लेकर एक मार्च का आह्वान किया था.

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Kanya Sumangla Mission Shakti Digital