Petrol Price Hike 2026: दुनिया की नजरें इस वक्त तेहरान और वॉशिंगटन के बयानों पर टिकी हैं, लेकिन इस ‘महायुद्ध’ का असली और दर्दनाक असर उन देशों की रसोई और सड़कों पर दिख रहा है जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह खाड़ी देशों पर निर्भर हैं. मिडिल ईस्ट संकट के कारण वैश्विक तेल बाजारों में लगी आग ने पाकिस्तान में महंगाई का ऐसा ‘सुनामी’ ला दिया है, जिसने आम नागरिक के पैरों तले जमीन खिसका दी है.
पाकिस्तान अपनी जरूरत का अधिकांश तेल सऊदी अरब और यूएई से ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के जरिए मंगाता है. यदि ईरान ने इस समुद्री रास्ते को पूरी तरह बंद किया, तो पाकिस्तान की पूरी अर्थव्यवस्था ठप हो सकती है. संकट केवल पाकिस्तान तक सीमित नहीं है. पड़ोसी देश बांग्लादेश भी इस वक्त तेल की भारी किल्लत से जूझ रहा है.
दिवालियापन की कगार पर ‘20% की मार’ (Pakistan Petrol Price Hike)
पहले से ही विदेशी कर्ज के बोझ तले दबे और आईएमएफ (IMF) की सख्त शर्तों के बीच सांस ले रहे पाकिस्तान की माली हालत अब ‘कोमा’ जैसी हो गई है. ईरान से जुड़े तनाव के कारण सप्लाई चेन बाधित हुई और शाहबाज शरीफ सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 20 प्रतिशत की एकमुश्त ऐतिहासिक बढ़ोतरी कर दी है.
पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने कीमतों में 55 रुपये प्रति लीटर के इजाफे का ऐलान किया. अब पाकिस्तान में पेट्रोल 321.17 रुपये और डीजल 335.86 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गया है. लाहौर और कराची जैसे महानगरों में पेट्रोल पंपों पर किलोमीटर लंबी लाइनें लग गई हैं. लोग राशन कार्ड की तरह ईंधन के लिए तरस रहे हैं.
खतरे में बांग्लादेश की सप्लाई चेन (Bangladesh Petrol Price Hike)
बांग्लादेश में पेट्रोल-डीजल का स्टॉक तेजी से कम हो रहा है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी कीमतों के कारण सरकार नए कॉन्ट्रैक्ट्स करने में हिचकिचा रही है, जिससे देश में फ्यूल रेशनिंग (सीमित आपूर्ति) की नौबत आ गई है. बांग्लादेश का गारमेंट एक्सपोर्ट उद्योग, जो उसकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, बिजली कटौती और डीजल की कमी के कारण संकट में है.
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दक्षिण एशिया का ‘चोक पॉइंट’
ईरान और अमेरिका के बीच जारी इस टकराव में ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ सबसे संवेदनशील बिंदु बन गया है. दुनिया का 20% कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने जमाखोरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी तो दी है, लेकिन हकीकत यह है कि जब तक मिडिल ईस्ट में मिसाइलें शांत नहीं होंगी, दक्षिण एशिया की जनता को इस ‘महंगाई के नरक’ से मुक्ति मिलना मुश्किल है.
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