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Chaitra Navratri 2026: 19 मार्च से शुरू होगा शक्ति की उपासना का महापर्व, इस बार 8 दिन के होंगे नवरात्र; जानें शुभ मुहूर्त और महत्व

चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से 27 मार्च तक चलेंगे. इस बार अष्टमी और नवमी तिथि एक ही दिन पड़ने के कारण कंजक पूजन का समय बदल गया है. साथ ही 19 मार्च से हिंदू नव संवत 2083 का आगाज़ भी होगा. मंदिरों और बाजारों में तैयारियां ज़ोरों पर हैं.

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Chaitra Navratri 2026: हिंदुओं के नव वर्ष और शक्ति की उपासना के महापर्व ‘चैत्र नवरात्रि’ को लेकर देशभर में भारी उत्साह देखा जा रहा है. इस वर्ष चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक चलेंगे. विशेष बात यह है कि इस बार तिथियों के उतार-चढ़ाव के कारण नवरात्रि नौ की जगह आठ दिनों के होंगे. मंदिरों से लेकर बाजारों तक, माता के स्वागत के लिए भव्य तैयारियां शुरू हो गई हैं.

हिंदू नव संवत 2083 का होगा आगाह

इस बार के चैत्र नवरात्रि इसलिए भी खास हैं क्योंकि 19 मार्च से ही हिंदुओं के नए साल यानी विक्रम संवत 2083 की शुरुआत होने जा रही है. अंबाला छावनी के मशहूर सनातन धर्म मंदिर के पुजारी बुद्धि वल्लभ शर्मा ने बताया कि नव वर्ष के आगमन के साथ इन नवरात्रों की महिमा और भी बढ़ गई है. 19 मार्च की सुबह विधि-विधान के साथ कलश स्थापना की जाएगी और माता की पहली आरती के साथ पर्व का शुभारंभ होगा.

अष्टमी और नवमी एक ही दिन

पुजारी बुद्धि वल्लभ शर्मा के अनुसार, इस बार अष्टमी और नवमी तिथि का अद्भुत संयोग बन रहा है. गणना के अनुसार:

अष्टमी पूजन: 26 मार्च की सुबह से शुरू होकर दोपहर 11:30 बजे तक रहेगा.

नवमी पूजन: 26 मार्च दोपहर 11:30 बजे से शुरू होकर 27 मार्च की सुबह 10:30 बजे तक चलेगा.

इसी कारण श्रद्धालु अपनी श्रद्धा अनुसार 26 मार्च की दोपहर के बाद या 27 मार्च की सुबह कंजक पूजन (कन्या पूजन) कर सकेंगे.

मंदिरों में रंग-रोगन और भव्य सजावट

नवरात्रि उत्सव को देखते हुए कालीबाड़ी मंदिर, सनातन धर्म मंदिर और अन्य प्रमुख सिद्धपीठों में तैयारियां युद्धस्तर पर चल रही हैं. मंदिरों की साफ-सफाई, रंग-रोगन और लाइटों से सजावट का काम अंतिम चरण में है. भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और दर्शन के विशेष प्रबंध किए गए हैं. सुबह 6:30 बजे से ही मंदिरों के कपाट खुल जाएंगे, जहाँ सुबह 9:00 बजे तक विशेष आरती और पूजन का दौर चलेगा.

खरीदारी के लिए उमड़ी भीड़

अंबाला के बाजारों में माता की चुनरी, श्रृंगार का सामान, नारियल और कलश की दुकानों पर भक्तों का तांता लगा हुआ है. व्रत के सामान जैसे कुट्टू का आटा, साबूदाना और फलाहार की मांग भी काफी बढ़ गई है. दुकानदार बताते हैं कि नवरात्रि शुरू होने से दो दिन पहले ही लोग पूजन सामग्री और माता के नए वस्त्रों की खरीदारी जमकर कर रहे हैं. बाजारों की यह रौनक नवमी की शाम तक बनी रहती है.

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श्रद्धा और संयम का संगम

नवरात्रि के दौरान महिला व पुरुष दोनों ही नौ दिनों तक कड़े अनुशासन का पालन करते हैं. अधिकांश श्रद्धालु फलाहारी व्रत रखते हैं और तामसिक भोजन का त्याग करते हैं. यह समय न केवल आध्यात्मिक शांति का है, बल्कि आत्म-शुद्धि का भी माना जाता है.

पुजारी जी ने माता रानी से प्रार्थना की है कि इस नव वर्ष और नवरात्रि के अवसर पर पूरे विश्व में शांति स्थापित हो और हमारा भारत देश निरंतर तरक्की की राह पर अग्रसर रहे. 19 मार्च को कलश स्थापना के साथ ही वातावरण भक्तिमय हो जाएगा और ‘जय माता दी’ के जयकारों से पूरा शहर गूंज उठेगा.

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-भारत एक्सप्रेस



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