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दिल्ली हाई कोर्ट का ईडब्ल्यूएस से लाभ लेने वाले छात्रों को लेकर बड़ा आदेश!

दिल्ली हाई कोर्ट ने ईडब्ल्यूएस (Economically Weaker Section) वर्ग के उम्मीदवारों को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस श्रेणी के उम्मीदवार एससी, एसटी और ओबीसी की तरह आयु में छूट या अतिरिक्त प्रयासों का लाभ नहीं मांग सकते.

Delhi High Court EWS ruling
Edited by Shubhra Rai

दिल्ली हाई कोर्ट ने साफ किया कि ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों को एससी-एसटी और ओबीसी की तरह आयु में छूट या अतिरिक्त अवसरों का लाभ नहीं मिलेगा और इस संबंध में दायर याचिका को खारिज कर दिया. चलिए जानते है पूरा मामला:

ईडब्ल्यूएस को लेकर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

दिल्ली हाई कोर्ट ने ईडब्ल्यूएस के लाभ लेने वाले छात्रों को लेकर बड़ा आदेश दिया है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति(एससी-एसटी)व अन्य पिछड़ा वर्ग की तरह ईडब्ल्यूएस में आयु में छूट या अतिरिक्त प्रयास की मांग नहीं कर सकते हैं.

जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की बेंच ने यह आदेश दिया है. यही कहते हुए कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया है. अदालत ने स्पष्ट किया है कि ईडब्ल्यूएस उम्मीदवार एससी/एसटी जैसे आरक्षित वर्गों के बराबर इस तरह की छूट के हकदार नहीं है.

आरक्षण का दायरा तय, छूट का प्रावधान नहीं

कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि संविधान के 103वें संशोधन (2019)के तहत ईडब्ल्यूएस वर्ग को दस फीसदी आरक्षण दिया गया है, लेकिन इसमें उम्र या प्रयासों में छूट का प्रावधान नहीं रखा गया. कोर्ट ने कहा कि ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों को उम्र और मौकों में छूट न देने का केंद्र सरकार का नीतिगत फैसला न तो मनमाना है और न ही असंवैधानिक है.

दायर याचिका में केंद्र सरकार की भर्तियों में एससी/एसटी और ओबीसी उम्मीदवारों को मिलने वाली ऊपरी आयु सीमा में छूट तथा परीक्षा के अतिरिक्त अवसरों के समान लाभ की मांग की गई थी.

सामाजिक और आर्थिक आरक्षण में अंतर स्पष्ट

कोर्ट ने कहा कि अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग को जो छूट दी जाती है, वह उनकी सामाजिक और शैक्षणिक को ध्यान में रखकर दी गई है. जबकि ईडब्ल्यूएस आरक्षण आर्थिक लाभ पर है, इसलिए दोनों की तुलना करना अनिवार्य नहीं है. याचिकाकर्ता के अनुसार यह स्थिति भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 16 का उल्लंघन है.

कोर्ट ने य्याचिक को खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ईडब्ल्यूएस श्रेणी के सदस्यों को उम्र में छूट देने या मौके की संख्या बढ़ाने के लिए रिट ऑफ मैडमस जारी करने का कोई मामला बनाने के विफल रहा है.

याचिका खारिज, केंद्र का फैसला सही ठहराया गया

कोर्ट ने यह भी कहा है कि अनुच्छेद 342 A सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए राज्य सरकार और केंद्र सरकार द्वारा सूचियों को अलग-अलग मानता है. इसलिए अगर कोई समुदाय केंद्र सरकार की सूची में शामिल नहीं है, भले ही वह राज्य सरकार की सूची में शामिल हो तो वह केंद्र सरकार के अधीन सेवाओं में आरक्षण का दावा नही कर सकता है.

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-भारत एक्सप्रेस 



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