Urdu Conclave 2026

वेदांता पावर प्लांट ब्लास्ट: CISF के हाथ लगे ‘लापरवाही’ के सुबूत, मृतकों की संख्या 24 पहुंची

Vedanta Power Plant Blast Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के वेदांता पावर प्लांट में हुए बॉयलर ब्लास्ट ने अब तक 24 बेगुनाह मजदूरों की जान ले ली है. बार-बार तकनीकी खराबी के बावजूद प्रबंधन ने क्यों नहीं लिया एक्शन? CISF की जांच में अब ‘मौत के कारखाने’ के कई खौफनाक राज खुलने वाले हैं.

Vedanta power plant blast Chhattisgarh

Vedanta Power Plant Blast Chhattisgarh: औद्योगिक विकास की इमारतें अक्सर मजदूरों के पसीने से खड़ी होती हैं, लेकिन जब सिस्टम की लापरवाही हावी होती है, तो यही इमारतें मजदूरों के लिए ‘कब्रगाह’ बन जाती हैं. छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के सिंघीतराई गांव स्थित ‘वेदांता पावर प्लांट’ में 14 अप्रैल को हुए भयंकर बॉयलर विस्फोट का दर्दनाक सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. रविवार को रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में जिंदगी और मौत से जंग लड़ रहे एक और मजदूर ने दम तोड़ दिया, जिसके बाद इस भयानक त्रासदी में जान गंवाने वालों का आधिकारिक आंकड़ा 24 तक पहुंच गया है.

झारखंड के मनीष की मौत

रविवार को जान गंवाने वाले मजदूर की पहचान झारखंड निवासी मनीष कुमार के रूप में हुई है. 14 अप्रैल को हुए इस विस्फोट में कुल 36 मजदूर बुरी तरह झुलस गए थे. अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल लगभग 12 घायल श्रमिकों का अस्पताल में इलाज चल रहा है, जिनमें से 3 की हालत अभी भी बेहद नाजुक (Critical) बनी हुई है. प्रशासन ने दावा किया है कि घायलों को बेहतरीन चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई जा रही है और मृतकों के परिजनों को सहायता दी जा रही है.

कैसे हुआ धमाका? (Vedanta Power Plant)

यह महाविनाश आखिर हुआ कैसे? तकनीकी जांच के अनुसार, यह भयंकर विस्फोट बॉयलर से टरबाइन तक उच्च दबाव (High Pressure) वाली भाप (Steam) ले जाने वाली नली (पाइप) के फटने के कारण हुआ. मुख्य बॉयलर निरीक्षक की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट प्लांट प्रबंधन की एक बड़ी लापरवाही की ओर इशारा कर रही है. रिपोर्ट में अत्यधिक ईंधन (Fuel) जमा होने और उसके कारण अचानक बने भारी दबाव को धमाके का मुख्य कारण बताया गया है.

ये भी पढ़ें: उत्तराखंड में ‘मदरसा बोर्ड’ की छुट्टी! CM धामी बोले- अलग सिलेबस पढ़ाया तो लगेगा ताला

CISF ने खंगाले 14 दिन के लॉगबुक (CISF investigation Vedanta)

केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की आठ सदस्यीय एक विशेष टीम 18 अप्रैल को प्लांट में पहुंची. टीम ने सीधे कंट्रोल रूम और प्रबंधन के दस्तावेजों को कब्जे में लेते हुए पिछले 14 दिनों के ‘उत्पादन लॉगबुक’ की गहराई से जांच की है. सूत्रों के हवाले से एक बेहद चौंकाने वाली बात सामने आई है. बताया जा रहा है कि इस प्लांट में पिछले एक साल में कई बार तकनीकी खराबी आई थी. लगभग 10 दिन पहले भी प्लांट में एक संक्षिप्त खराबी दर्ज की गई थी, जिसे संभवतः नजरअंदाज कर दिया गया.



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read