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शमशाद बेगम: भारतीय सिनेमा की बुलंद आवाज और 6000 गानों की विरासत

Shamshad Begum biography: भारतीय सिनेमा की मशहूर गायिका शमशाद बेगम ने बिना प्रशिक्षण के अपनी दमदार आवाज से पहचान बनाई. उन्होंने करीब 6000 गाने गाए और पद्म भूषण से सम्मानित हुईं.

Shamshad Begum biography: भारतीय फिल्म जगत की मशहूर गायिका शमशाद बेगम का जन्म 14 अप्रैल 1919 को अमृतसर में हुआ था. बचपन से ही उन्हें गाने का शौक था और बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के उन्होंने अपनी दमदार आवाज से पहचान बना ली. अपने करियर में उन्होंने करीब 6000 गाने गाए.

रेडियो से फिल्मों तक का सफर

1937 में उन्होंने लाहौर और पेशावर रेडियो पर पहला कार्यक्रम दिया. उनकी प्रतिभा को मास्टर गुलाम हैदर ने पहचाना और 1940 में पंजाबी फिल्म यमला जट से उन्होंने फिल्मों में कदम रखा. 1941 की फिल्म खजांची के गाने ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय बना दिया. इसके बाद वह मुंबई आ गईं.

संगीतकारों की पहली पसंद

मुंबई में नौशाद, ओ.पी. नैय्यर, एस.डी. बर्मन और सी. रामचंद्र जैसे बड़े संगीतकारों ने उनकी आवाज को सराहा. 1940 और 1950 के दशक में वह सबसे ज्यादा मेहनताना पाने वाली गायिकाओं में शामिल थीं.

अमर गीतों की विरासत

उनके गाए गीतों में मेरे पिया गए रंगून, कभी आर कभी पार, काजरा मोहब्बत वाला, लेके पहला पहला प्यार, होली आई रे कन्हाई और तेरी महफिल में किस्मत आजमा कर जैसे गाने आज भी लोगों की जुबान पर हैं.

कई भाषाओं में योगदान

लता मंगेशकर के दौर में भी अपनी जगह बनाए रखने वाली शमशाद बेगम ने हिंदी के अलावा बंगाली, मराठी, गुजराती, तमिल और पंजाबी में भी गाने गाए.

सम्मान और आखिरी पड़ाव

2009 में उन्हें पद्म भूषण और ओ.पी. नैय्यर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया. 23 अप्रैल 2013 को 94 साल की उम्र में मुंबई में उनका निधन हो गया.

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निजी जिंदगी का किस्सा

उनकी शादी भी चर्चा में रही. मुस्लिम परिवार से होने के बावजूद उन्होंने हिंदू युवक गणपत से शादी की. परिवारों के विरोध और समाज के तानों के बावजूद दोनों ने 1932 में शादी कर ली.

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-भारत एक्सप्रेस



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