IndiGo flight power bank blast: चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर मंगलवार (5 मई) को एक ऐसी घटना हुई जिसने फ्लाइट सुरक्षा और पावर बैंक के इस्तेमाल पर फिर चिंता बढ़ा दी. हैदराबाद से आ रही इंडिगो की फ्लाइट में एक यात्री के पावर बैंक में अचानक आग लग गई, जिससे केबिन में तेजी से धुआं फैल गया. स्थिति बिगड़ते ही क्रू ने तुरंत इमरजेंसी प्रोटोकॉल लागू किया और यात्रियों को स्लाइड की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला गया. इस दौरान कुछ यात्रियों को हल्की चोटें भी आईं, हालांकि सभी को समय रहते सुरक्षित निकाल लिया गया.
एयरलाइन के अनुसार, यह घटना विमान की लैंडिंग के बाद हुई और तुरंत कार्रवाई करके हालात को नियंत्रण में कर लिया गया. इस घटना के बाद एक बार फिर सवाल उठ रहा है कि रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाला छोटा सा पावर बैंक भी विमान में कितना बड़ा जोखिम बन सकता है.
किस फ्लाइट में हुआ हादसा?
इंडिगो की फ्लाइट 6E 108 (HYD-IXC), जो हैदराबाद से चंडीगढ़ जा रही थी, उसमें बीच सफर के दौरान एक यात्री के पावर बैंक में अचानक विस्फोट हो गया और उससे धुआं निकलने लगा. धुआं देखते ही यात्री ने तुरंत क्रू को इसकी जानकारी दी. इसके बाद फ्लाइट स्टाफ ने फायर एक्सटिंग्विशर की मदद से आग पर काबू पाने की कोशिश की, लेकिन तब तक केबिन में धुआं फैल चुका था और यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई.
इस विमान में 198 यात्री, दो छोटे बच्चे और 6 क्रू मेंबर मौजूद थे. स्थिति को संभालते हुए विमान को करीब ढाई से साढ़े तीन बजे के आसपास चंडीगढ़ इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंड करा लिया गया.
पावर बैंक कैसे काम करता है?
पावर बैंक एक छोटा सा पोर्टेबल चार्जर होता है, जिसमें खास तरह की बैटरियां लगी होती हैं, जैसे लिथियम-आयन या लिथियम-पॉलिमर. ये बैटरियां पहले से बिजली जमा कर लेती हैं और बाद में मोबाइल या अन्य डिवाइस को चार्ज करने के काम आती हैं.
इन बैटरियों की खासियत यह होती है कि ये कम जगह में ज्यादा ऊर्जा स्टोर कर सकती हैं. लेकिन अगर इनमें किसी तरह की खराबी हो जाए या तापमान बहुत बढ़ जाए, तो ये असुरक्षित हो सकती हैं. ऐसे में ओवरहीटिंग, शॉर्ट सर्किट या बैटरी के अंदर रिएक्शन बढ़ने जैसी स्थिति पैदा हो सकती है, जिससे आग लगने या ब्लास्ट का खतरा बन जाता है..
पावर बैंक में आग क्यों लगती है?
पावर बैंक में आग लगने के पीछे सबसे आम कारण इसका ज्यादा गर्म होना होता है. जब बैटरी जरूरत से ज्यादा गर्म हो जाती है, तो उसके अंदर चल रही रासायनिक प्रक्रिया असंतुलित हो सकती है और यह खतरनाक स्थिति पैदा कर देती है. दूसरा बड़ा कारण ओवरचार्जिंग है. कई लोग पावर बैंक को लंबे समय तक, खासकर रातभर चार्ज पर लगा छोड़ देते हैं, जिससे बैटरी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है.
इसके अलावा, कम गुणवत्ता वाले या सस्ते पावर बैंक भी जोखिम बढ़ाते हैं, क्योंकि इनमें सही सेफ्टी सिस्टम नहीं होता जो बैटरी को सुरक्षित रख सके. अगर पावर बैंक गिर जाए, दब जाए या उसे कोई नुकसान हो जाए, तो उसके अंदर के हिस्से खराब होकर चिंगारी पैदा कर सकते हैं. बंद जगह जैसे फ्लाइट के केबिन में ऐसी स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है, क्योंकि आग और धुआं तेजी से फैल सकते हैं.
फ्लाइट में पावर बैंक क्यों ज्यादा जोखिम भरा होता है?
एविएशन सुरक्षा नियम इसे गंभीर खतरे के रूप में देखते हैं. इसी वजह से DGCA के अनुसार पावर बैंक को हमेशा केबिन बैग में रखना जरूरी होता है, इसे चेक-इन लगेज में रखने की अनुमति नहीं है. इसका कारण यह है कि अगर बैटरी में कोई खराबी या आग लगती है, तो केबिन में तुरंत पता चल जाता है और उस पर जल्दी काबू पाया जा सकता है, जबकि कार्गो में ऐसा संभव नहीं होता. इसी सुरक्षा कारण से कई एयरलाइंस फ्लाइट के दौरान पावर बैंक के इस्तेमाल पर भी रोक लगाने लगी हैं.
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पावर बैंक से सुरक्षित रहने के तरीके
पावर बैंक आज-कल की जरूरत बन चुका है, लेकिन थोड़ी सी सावधानी न रखने पर यह खतरा बन सकता है. हमेशा भरोसेमंद और सर्टिफाइड कंपनी का पावर बैंक ही इस्तेमाल करें और सस्ते या बिना ब्रांड वाले प्रोडक्ट से बचें. चार्जिंग के दौरान ध्यान रखें कि डिवाइस जरूरत से ज्यादा गर्म न हो. अगर तापमान बढ़ता दिखे, तो तुरंत चार्जिंग रोक दें.
ऐसा पावर बैंक कभी इस्तेमाल न करें जो टूटा हुआ हो या जिसकी बैटरी फूल गई हो, क्योंकि ऐसे डिवाइस में खराबी और हादसे का खतरा ज्यादा होता है. फ्लाइट में इसे हमेशा ऐसी जगह रखें जहां आप आसानी से नजर रख सकें. इसे ऊपर वाले केबिन में रखने से बचें और बैग में भी इस तरह रखें कि उस पर दबाव न पड़े या वह किसी मेटल की चीज के संपर्क में न आए.
-भारत एक्सप्रेस
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