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‘कमल’ तो खिल गया, पर कांटों भरी है आगे की राह; बंगाल में जीत के बाद बीजेपी के सामने खड़ी हैं ये बड़ी चुनौतियां

Bengal BJP Challenges: बंगाल दशकों से राजनीतिक हिंसा, सत्ता संघर्ष, नक्सलवाद की जन्मभूमि के रूप में पहचाना जाता रहा है. ऐसे में बीजेपी के लिए इस राज्य को चलाना बिल्कुल भी आसान नहीं होगा. बीजेपी के पास कई ऐसे मुद्दे हैं, जिनसे बीजेपी को पार पाना होगा.

Bengal BJP Challenges

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Bengal BJP Challenges: साल 2026 के सबसे बड़े चुनाव में बीजेपी विजेता बनकर उभरी है. पश्चिम बंगाल में 200 से ज्यादा सीटों पर जीत दर्ज कर वो पहली बार सत्ता में आ रही है. पीएम मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने असंभव लग रहे बंगाल की चुनौती को सफलतापूर्वक फतह कर भारतीय राजनीति में अपनी अलग पहचान दर्ज करा ली. इस जोड़ी ने बंगाल जैसे सूबे में जीत दर्ज कर देश का राजनीतिक नक्शा बदल दिया.

बीजेपी का पश्चिम बंगाल में इस ऐतिहासिक जीत के कई मायने हैं. इन नतीजों ने ना सिर्फ पिछले 15 सालों से सत्ता में बैठी ममता बनर्जी के चूलें हिला दिये, बल्कि आने वाले समय में होने वाले चुनावों में जीत की राह भी आसान कर दी.

यह सूबा दशकों से राजनीतिक हिंसा, सत्ता संघर्ष, नक्सलवाद की जन्मभूमि के रूप में पहचाना जाता रहा है. ऐसे में बीजेपी के लिए इस राज्य को चलाना बिल्कुल भी आसान नहीं होगा. बीजेपी के पास कई ऐसे मुद्दे हैं, जिनसे बीजेपी को पार पाना होगा. आखिर बीजेपी के सामने बंगाल में कौन-कौन सी चुनौतियां सामने आने वाली हैं? आइये बताते हैं.

बीजेपी के लिए यह जीत सिर्फ सत्ता का विस्तार नहीं है, बल्कि एक बड़ी वैचारिक जीत है. भारतीय जनता पार्टी के वैचारिक पिता कहे जाने वाले श्यामा प्रसाद मुखर्जी भी इसी जमीन से आते हैं, लेकिन आजादी के बाद से लेकर एक दशक पहले तक बीजेपी यहां किसी भी क्षेत्र में मुख्य भूमिका में नजर नहीं आती थी. ऐसे में बीजेपी के पास सुशासन की गंभीर चुनौतियां होंगी.

राजनीतिक हिंसा को रोकना

बंगाल दशकों से राजनीतिक हिंसा की चपेट में रहा है. पूर्वर्ती सरकारों पर हिंसा को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे हैं. बंगाल में हिंसा के ऐसे कई मिसाल मिल जाएंगे, जिसमें किसी दूसरी पार्टी को वोट देने या समर्थन करने के आरोप में हत्या कर दिया जाता था. यहीं नहीं कई महिलाओं को बीजेपी को समर्थन करने के आरोप में यौन उत्पीड़न जैसे जघन्य अपराधों से गुजरना पड़ा. ऐसे में बीजेपी के पास राजनीतिक संरक्षण में होने वाली हिंसा को रोकना बड़ी चुनौतियों में से एक होगा.

महिलाओं के खिलाफ अपराध

बंगाली भद्रलोक समाज में महिलाओं की स्थिति हमेशा से मजबूत रही है, लेकिन ये सिर्फ एक पहलू है. बंगाल के ग्रामीण इलाकों विशेषकर अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे हुए इलाकों में महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न, गैंगरेप और उनके साथ अन्य गंभीर अपराध की खबरें लगातार आती रहती हैं. आरजीकर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक महिला डॉक्टर के साथ गैंगरेप और हत्या का मामला अभी ताजा उदाहरण है. इस प्रकार की चुनौतियों को रोकना बीजेपी के लिए बेहद जरूरी हैं.

घुसपैठ को रोकना बेहद जरूरी

बंगाल चुनाव में जीत के बाद पीएम मोदी 4 मई की शाम को जब जनता को संबोधित कर रहे थे तो उन्होंने ऐलान किया था कि अब घुसपैठ पर करारा प्रहार किया जाएगा. पीएम मोदी के इस भाषण से अनुमान लगाया जा सकता है कि बंगाल में घुसपैठ कितना बड़ा मुद्दा है. पश्चिम बंगाल में बीजेपी की जीत में घुसपैठ के मुद्दे ने भी अहम भूमिका निभाई.

पड़ोसी बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल में बड़े पैमाने पर घुसपैठ ने कई इलाकों की धार्मिक और जातीय अनुपात को गंभीर बना दिया है. आरोप लगते रहे हैं कि सत्ता के संरक्षण में इन घुसपैठियों का हर जरूरी प्रमाण पत्र बनाए गए हैं. जिससे वहां के आम लोगों को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. इसके अलावा घुसपैठियों की यह भीड़ बेहद उन्मादी होती है. जिससे इलाके में कानून व्यवस्था को चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. बीजेपी को इससे निपटने के लिए कारगर उपाय अपनाना ही होगा.

विकास और रोजगार का मुद्दा सबसे अहम

बंगाल कभी भारत की आर्थिक और बौद्धिक राजधानी के रूप में जाना जाता था. सूत, जूट, चाय, फिल्म उद्योग सहित कई ऐसे क्षेत्र थे जिसमें यह राज्य भारत का नेतृत्व करता था. लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी और भयंकर हिंसक संघर्ष ने भारत के इस राज्य को तोड़कर रख दिया. सोने की कारिगरी से लेकर जूट के सामान बनाने वाले मजदूर तक अब बंगाल में बेरोजगार घूमते मिल जाएंगे.

रोजगार की कमी और विकास की धीमी रफ्तार ने बंगाल की अर्थव्यवस्था को चौपट कर दिया. महाराष्ट्र और गुजरात जैसे विकसित राज्यों की तुलना में पश्चिम बंगाल लंबे समय तक राजनीतिक हिंसा और आर्थिक सुस्ती के दौर से गुजरता रहा है. इस राज्य का बुनियादी ढांचा और वर्क कल्चर सुस्त हो गए हैं. अब केंद्र और राज्य सरकार को विकास की रफ्तार को आगे बढ़ाना अहम जिम्मेदारी होगी. बंगाल भी अगर विकास के रास्ते पर दोबारा वापस आता है तो यह पीएम मोदी के विकसित भारत के सपने को सच करने की दिशा में एक और कदम होगा.

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इतिहास गवाह है कि जिसने भी बंगाल की सत्ता पर अपना नियंत्रण रखा है, उसने लंबे समय तक देश की दशा और दिशा तय की है. बंगाल की जीत ने यह साफ कर दिया है कि विपक्ष के पास पीएम मोदी और अमित शाह की कूटनीति का कोई काट नहीं है.

-भारत एक्सप्रेस



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