सुप्रीम कोर्ट कोल ब्लॉक घोटाले से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में निचली अदालत में आरोप तय करने की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग वाली ईडी की याचिका पर 15 मई को सुनवाई करेगा. सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ईडी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करेगी. ईडी ने अमरकोंडा मुर्गाडंगल कोल ब्लॉक आवंटन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है.
राऊज एवेन्यू कोर्ट के आदेश को चुनौती
ईडी द्वारा दायर याचिका में राऊज एवेन्यू कोर्ट के 25 मार्च के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें अदालत ने आरोप तय करने की प्रक्रिया टालने से इनकार कर दिया था. ईडी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 346 के तहत मांग की थी कि जब तक सुप्रीम कोर्ट संबंधित कानूनी मुद्दों पर अपना फैसला नहीं दे देता है, तब तक आरोप तय करने की प्रक्रिया स्थगित रखी जाए.
कोल ब्लॉक आवंटन और कानूनी सवाल
ईडी द्वारा दायर याचिका में यह भी कहा गया है कि क्या कोल ब्लॉक आवंटन पत्र को धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत संपत्ति और अपराध से अर्जित आय माना जा सकता है? ईडी ने कहा है कि जब यही मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, ऐसे में ट्रायल कोर्ट को आरोप तय करने की प्रक्रिया को रोकनी चाहिए. बता दें कि मामले की जांच सीबीआई भी कर रही है.
क्या है अमरकोंडा मुर्गाडंगल कोल ब्लॉक मामला?
यह मामला 2008 में बीरभूम में अमरकोंडा मुर्गाडंगल कोल ब्लॉक आवंटन में अनियमितताओं से जुड़ा है. सीबीआई ने इस मामले में दसारी नारायण राव, नवीन जिंदल व अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी, घूसखोरी और पद के दुरुपयोग का केस दर्ज किया था और चार्जशीट दाखिल की थी.
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एजेंसी ने जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड (जेएसपीएल) और गगन स्पॉन्ज आयरन प्राइवेट लिमिटेड व जिंदल की एक और फर्म पर आरोप लगाया कि उन्होंने गलत तथ्यों पर 2008 में झारखंड का अमरकोंडा मुर्गाडंगल कोयला ब्लॉक हासिल किया था. उस वक्त राव कोयला राज्य मंत्री थे. सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 1993 से 2010 के बीच कोल ब्लॉक आवंटित करने में अपनाए गए हर तरीके की भर्त्सना की थी.
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