आवारा कुत्तों के मामले में दायर विभिन्न याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट 19 मई को फैसला सुनाएगा. सभी पक्षों की जिरह के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. कोर्ट ने सभी पक्षों से एक सप्ताह में लिखित दलील देने को कहा था. मामले की सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी गौरव अग्रवाल ने पंजाब, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सहित अन्य राज्यों द्वारा उठाए गए कदमों से संबंधित जानकारी कोर्ट को दी है.
संस्थाओं में कुत्तों की मौजूदगी पर चिंता
इससे पहले कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा था कि ये सब हवाई महल बना रहे हैं. वहीं जब राज्यों ने पहले के निर्देश मानने को लेकर तर्क दिए तो अदालत ने इसे मनगढ़ंत कहानियां बताया था. कोर्ट ने स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और दूसरी संस्थाओं में आवारा कुत्तों की मौजूदगी पर चिंता जताई है. मामले की सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी गौरव अग्रवाल ने कोर्ट को बताया कि मैंने अपने नोट में चार पहलुओं पर चर्चा की है.
एबीसी (ABC) केंद्र और राज्यों का ऑडिट
एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) केंद्रों का कामकाज, कोर्ट के निर्देशानुसार डॉग पाउंड्स की आवश्यकता, हाईवे की पहचान और मवेशियों के प्रवेश की रोकथाम; एमिकस क्यूरी ने आंध्र प्रदेश से शुरुआत करते हुए राज्यवार आंकड़े प्रस्तुत किए. राज्यों को मौजूदा सुविधाओं का ऑडिट करना चाहिए. नए एबीसी केंद्र चरणबद्ध तरीके से स्थापित किए जा सकते हैं और इसके लिए समय-सीमा तय की जानी चाहिए.
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस संदीप मेहता ने पूछा कि क्या बजटीय आवंटन के बारे में कोई संकेत है? इस पर एमिकस क्यूरी ने कोर्ट को बताया कि 14000 संस्थानों की पहचान की गई है. 1145 आवारा कुत्तों को स्थानांतरित किया गया है. शैक्षणिक संस्थानों में आवारा कुत्तों की पहचान में राज्यों को सहायता लेनी चाहिए. डॉग पाउंड्स से समन्वय होना चाहिए. 204 हाईवे स्ट्रेच की पहचान की गई है और 414 मवेशियों को पाउंड शेल्टर में शिफ्ट किया गया है.
असम और बिहार के आंकड़ों पर कोर्ट की सख्ती
मामले की सुनवाई के दौरान आंध्र प्रदेश सरकार की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि एमिकस क्यूरी द्वारा दिए गए सुझाव पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है. एमिकस क्यूरी ने कोर्ट को यह भी बताया कि असम में 3 म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन हैं. इन्हें प्राथमिकता दी जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि एबीसी केंद्र अपर्याप्त हैं. राज्य को एक ठोस एक्शन प्लान देना चाहिए. जस्टिस मेहता ने कहा कि क्षमता क्यों नहीं बढ़ाई जा रही है?
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छह केंद्र तो बहुत कम हैं. स्टाफ की संख्या बहुत कम है. उन्होंने कहा कि बिना पर्याप्त कर्मचारियों के काम नहीं हो सकता. इस पर एमिकस क्यूरी ने कहा कि असम को अधिक प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है. बिहार पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर राज्य में छह लाख से ज्यादा आवारा कुत्ते हैं, तो सिर्फ 20 हजार कुत्तों की नसबंदी काफी नहीं है. कोर्ट ने कहा कि ज्यादातर राज्यों ने कुत्तों के काटने के मामलों का सही आंकड़ा नहीं दिया है.
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