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गोंदिया के न्यू बालाजी हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने रची नवजात बच्चों के सौदे की घिनौनी साजिश, 1001 महिलाओं के स्वास्थ्य से खिलवाड़

गोंदिया के न्यू बालाजी हॉस्पिटल का काला सच आया सामने. डॉ. नितेश बाजपेयी और अन्य डॉक्टरों ने पैसों के लिए बेचे नवजात बच्चे और किया 1001 महिलाओं के स्वास्थ्य से खिलवाड़. प्रशासन ने की सख्त कार्रवाई, लाइसेंस रद्द. पूरी रिपोर्ट पढ़ें.

Gondia News, New Balaji Hospital

Gondia News: गोंदिया के रामनगर इलाके में स्थित ‘न्यू बालाजी हॉस्पिटल’ से जुड़ा एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. भगवान कहे जाने वाले डॉक्टरों ने चंद पैसों की खातिर नवजात बच्चों के सौदे किए और नाबालिग लड़कियों की जिंदगी से खिलवाड़ किया. भंडारा पुलिस द्वारा किए गए इस खुलासे के अनुसार, इस अस्पताल की आड़ में अवैध गर्भपात, नाबालिग लड़कियों की डिलीवरी और फिर उन नवजात बच्चों को लाखों रुपये में बेचने का एक घिनौना रैकेट चलाया जा रहा था. पुलिस ने बेचे गए दो मासूम बच्चों को रेस्क्यू कर बाल कल्याण समिति को सौंप दिया है.

गरीब महिलाओं को ऐसे बनाते थे शिकार

इस गिरोह के हौसले इतने बुलंद थे कि ‘बाई गंगाबाई सरकारी महिला अस्पताल’ में आने वाली गरीब महिलाओं को निशाना बनाया जाता था. दलाल और आरोपी डॉक्टर इन महिलाओं को बहला-फुसलाकर न्यू बालाजी हॉस्पिटल लाते थे.
उन्हें डराया जाता था कि उनके गर्भ में पल रहे बच्चे की स्थिति गंभीर है और कम पैसों में इस निजी अस्पताल में डिलीवरी करा दी जाएगी.

कुछ महिलाओं की कमजोर आर्थिक स्थिति को देखकर उनसे कहा जाता था कि उनका बच्चा कमजोर है, इसलिए उसे किसी एनजीओ (NGO) को दे दिया जाए. बाद में इन्हीं बच्चों को ऊंची कीमतों पर बेच दिया जाता था.

1001 महिलाओं के स्वास्थ्य से खिलवाड़

जांच आगे बढ़ने पर अस्पताल के एक और बड़े खेल का पर्दाफाश हुआ, जो अवैध सोनोग्राफी सेंटर से जुड़ा था. सितंबर 2025 में, मुख्य आरोपी डॉ. नितेश बाजपेयी ने रेडियोलॉजिस्ट डॉ. खुशाल घोडेस्वार के साथ एक करार किया था ताकि सरकारी योजना के तहत गर्भवती महिलाओं की सोनोग्राफी की जा सके. नियम के मुताबिक सोनोग्राफी सिर्फ डॉ. खुशाल को ही करनी थी, जिसकी अनुमति जिला शल्य चिकित्सक डॉ. पुरुषोत्तम पटले ने दी थी.

लेकिन डॉ. नितेश बाजपेयी ने बड़ी जालसाजी करते हुए डॉ. खुशाल के सर्टिफिकेट पर डॉ. विवेक येळे का नाम डाल दिया. इसके बाद डॉ. खुशाल को बुलाए बिना ही पिछले 8 महीनों में सरकारी अस्पताल से भेजी गई 1001 गर्भवती महिलाओं की सोनोग्राफी खुद डॉ. नितेश बाजपेयी और डॉ. विवेक येळे ने कर डाली. मेडिकल नियमों के अनुसार, एक प्रसूति रोग विशेषज्ञ तकनीकी रूप से जटिल सोनोग्राफी नहीं कर सकता. मामला सामने आने पर 15 अप्रैल 2026 को इस सोनोग्राफी सेंटर का लाइसेंस रद्द कर दिया गया.

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इंस्टाग्राम से मिले पक्के सबूत

डॉ. विवेक येळे ‘बाई गंगाबाई सरकारी महिला अस्पताल’ में कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर स्त्री रोग विशेषज्ञ के रूप में तैनात थे. सरकारी नियमों के मुताबिक, कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले डॉक्टर किसी भी निजी अस्पताल में प्रैक्टिस या सेवा नहीं दे सकते, लेकिन वे न्यू बालाजी हॉस्पिटल में इस काले धंधे के साझीदार बने हुए थे.

रामनगर पुलिस की जांच में सामने आया कि एक नाबालिग लड़की की डिलीवरी के वक्त मुख्य आरोपी डॉ. नितेश बाजपेयी, डॉ. विवेक येळे और रजेगांव अस्पताल से रिटायर्ड डॉ. आशा अग्रवाल शामिल थीं. इन्होंने न सिर्फ डिलीवरी कराई, बल्कि बच्चे की बिक्री में मदद की और पुलिस से इस बात को छुपाया. इसके पक्के डिजिटल सबूत खुद मुख्य आरोपी डॉ. नितेश बाजपेयी ने अपने इंस्टाग्राम पेज पर डाल रखे थे, जहां ये डॉक्टर अस्पताल में डिलीवरी करते दिखाई दे रहे हैं.

प्रशासन की सख्त कार्रवाई

मामला उजागर होने के बाद प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं. गोंदिया मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. कुसुमाकर घोरपडे ने डॉ. विवेक येळे को नौकरी से सस्पेंड कर दिया है. जिला शल्य चिकित्सक डॉ. पुरुषोत्तम पटले ने ‘न्यू बालाजी हॉस्पिटल’ का लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द कर दिया है. पकड़े जाने के डर से डॉ. बाजपेयी द्वारा अस्पताल की सोनोग्राफी और डिलीवरी से जुड़े सारे रिकॉर्ड नष्ट कर दिए गए थे. फिलहाल पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी डॉ. नितेश बाजपेयी समेत 10 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट पेश कर दी है.

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-भारत एक्सप्रेस



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