US Iran War Update: पश्चिम एशिया (Middle East) में पिछले कई महीनों से चले आ रहे विनाशकारी युद्ध और तनाव के बीच एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक खबर सामने आई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान एक बड़े शांति समझौते (Peace Deal) को अंतिम रूप देने के बेहद करीब पहुंच चुके हैं. इस समझौते की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली शर्त यह है कि ईरान अपने ‘एनरिच्ड यूरेनियम’ (Enriched Uranium) के विशाल भंडार को छोड़ने के लिए राजी हो गया है. ट्रंप ने इसे अपनी सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत बताया है.
चेतावनी के बाद यूरेनियम पर ‘सरेंडर’ (US Iran war peace deal)
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान शुरू में समझौते के पहले चरण में यूरेनियम के मुद्दे को टालना चाहता था. लेकिन, अमेरिकी वार्ताकारों ने साफ चेतावनी दी थी कि अगर तेहरान ने यूरेनियम छोड़ने की प्रतिबद्धता नहीं जताई, तो अमेरिका बातचीत से हट जाएगा और इस्फ़हान परमाणु संयंत्र (Isfahan Nuclear Facility) जैसे ठिकानों पर सैन्य हमले (कमांडो रेड या बंकर-बस्टर स्ट्राइक) शुरू कर देगा.
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इस दबाव के बाद ईरान झुक गया. अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, ईरान के पास लगभग 970 पाउंड यूरेनियम है, जिसे 60 प्रतिशत तक समृद्ध किया गया है. अब विकल्पों पर विचार किया जा रहा है कि इस यूरेनियम को 2015 की तरह रूस को सौंप दिया जाए या फिर इसके संवर्धन स्तर को कम कर दिया जाए ताकि इससे परमाणु बम न बन सके.
ग्लोबल इकोनॉमी को संजीवनी (US Iran Middle East ceasefire)
राष्ट्रपति ट्रंप के बयान का सबसे अहम हिस्सा ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) को लेकर था. यह समुद्री रास्ता दुनिया के तेल व्यापार की रीढ़ है. ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा, “समझौते के कई दूसरे हिस्सों के साथ-साथ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को भी खोला जाएगा.” होर्मुज के खुलने से दुनिया भर में वैश्विक तेल आपूर्ति सामान्य हो जाएगी और शिपिंग में आ रही रुकावटें दूर होंगी. यह भारत जैसे देशों के लिए एक बहुत बड़ी राहत है, जो खाड़ी देशों के तेल आयात पर काफी हद तक निर्भर हैं.
ग्लोबल लीडर्स के साथ ट्रंप की ‘सुपर-कॉल’ (US Iran War Latest Breaking)
इस समझौते के “शांति से संबंधित समझौता ज्ञापन” (MOU) तक पहुंचने से पहले डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया के कई प्रमुख नेताओं से लंबी बातचीत की. इनमें इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू, सऊदी अरब के प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, यूएई के मोहम्मद बिन जायद, कतर के अमीर, मिस्र के राष्ट्रपति, तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन और पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर शामिल थे.
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