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PFI Conspiracy: ‘2047 तक भारत में शरिया कानून लागू करने की थी साजिश’, पटियाला हाउस कोर्ट का बड़ा आदेश

PFI Case: पटियाला हाउस कोर्ट ने PFI और उसके 20 सदस्यों पर UAPA के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया है. कोर्ट के अनुसार, यह संगठन ‘विजन 2047’ के तहत भारत में शरिया कानून स्थापित करने की बड़ी साजिश रच रहा था.

Patiala House Court
Edited by Shubhra Rai

PFI Case: पटियाला हाउस कोर्ट ने PFI और उसके 20 सदस्यों पर UAPA के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया है. कोर्ट के अनुसार, यह संगठन ‘विजन 2047’ के तहत भारत में शरिया कानून स्थापित करने की बड़ी साजिश रच रहा था. पटियाला हाउस कोर्ट ने पीएफआई और उसके 20 सदस्यों के खिलाफ यूएपीए और आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया है.

कोर्ट ने सभी के खिलाफ आपराधिक साजिश, देश के खिलाफ जंग छेड़ने, आतंकी गतिविधियों के लिए साजिश रचने, टेरर कैंप ऑर्गनाइज करने सहित अन्य अपराधों में आरोप तय करने का निर्देश दिया है.

पीएफआई का ही एक दस्तावेज

कोर्ट 10 जुलाई को आधिकारिक तौर पर आरोप तय करेगा. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से गंभीर संदेह पैदा होता है कि आरोपी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया और उसकी राष्ट्रीय कार्यकारिणी परिषद के माध्यम से भारत की धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक सरकार को उखाड़ फेंकने और 2047 तक या उससे पहले भारत में शरिया कानून स्थापित करना चाहते थे.

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि विजन 2047 दस्तावेज पीएफआई का ही एक दस्तावेज था, जिसमें हिंदू नेताओं को निशाना बनाने और इराक और सीरिया के इस्लामिक स्टेट को समर्थन देने के संस्थागत निर्णय पीएफआई की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में लिया गया था.

धर्मों के खिलाफ भड़काने की साजिश

कोर्ट ने कहा कि यह कार्य पदाधिकारियों के अपनी व्यक्तिगत हैसियत में किए गए व्यक्तिगत कार्य नहीं थे बल्कि ये पीएफआई के उसके निदेशक मस्तिष्कों के माध्यम से किया गया था. आरोप तय करने को लेकर हो रही सुनवाई के दौरान एनआईए की ओर से पेश वकील ने कहा था कि पीएफआई देश मे शरिया कानून लागू करने के उद्देश्य से संगठित तरीके से काम कर रहा था.

एनआईए के मुताबिक प्रतिबंधित हो चुके इस संगठन ने देश भर में अपने कार्यालय खोलकर मुस्लिम युवाओं को गुमराह किया और उन्हें अन्य धर्मों के खिलाफ भड़काने की साजिश रची.

11 करोड़ रुपये से अधिक नकद चंदा

एनआईए का आरोप है कि पीएफआई का एजेंडा केवल एक सामाजिक संगठन के रूप में काम करने तक ही सीमित नहीं था, बल्कि इनका मकशद देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान के खिलाफ गतिविधियों को अंजाम देना था. बता दें कि पीएफआई की राजनीतिक शाखा माने जाने वाले सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया को 2018-19 से 11 करोड़ रुपये से अधिक नकद चंदा मिला है.

दिल्ली में एक गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के रूप में एसडीपीआई गठत जून 2009 में किया गया था और अप्रैल 2010 में निर्वाचन आयोग के पास इसे पंजीकृत कराया गया. बता दें कि केंद्र सरकार ने साल 2022 में पीएफआई व उससे संबंधित कई अन्य संगठनों पर पांच साल का प्रतिबंध लगा दिया था.

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-भारत एक्सप्रेस 



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