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लंदन में गूंजा हनुमान चालीसा, फिल्म निर्माता अनुप्रिया नागर ने हाउस ऑफ लॉर्ड्स में दिया सेतु-निर्माण का संदेश

हाउस ऑफ लॉर्ड्स में अनुप्रिया नागर ने भारतीय संस्कृति और आस्था पर प्रेरक भाषण दिया. उन्होंने युवाओं को समुदायों के बीच सेतु बनाने का संदेश दिया और अपनी फिल्म ‘हनुमान अंश’ के जरिए भारतीय आध्यात्मिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की कोशिश की.

लंदन में हाउस ऑफ लॉर्ड्स के मंच पर बाथ विश्वविद्यालय की पूर्व छात्रा और फिल्म निर्माता अनुप्रिया नागर ने युवाओं को आस्था, संस्कृति और कहानी कहने की कला के महत्व पर प्रेरक संदेश दिया. उन्होंने भारतीय आध्यात्मिक ज्ञान और अपने छात्र जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि अलग‑अलग संस्कृतियों और समुदायों के बीच सेतु बनाना आज की सबसे बड़ी ज़रूरत है.

हनुमान चालीसा से शुरुआत

अपने संबोधन की शुरुआत अनुप्रिया ने हनुमान चालीसा की चौपाई से की. उन्होंने समझाया कि इन पंक्तियों का अर्थ भौतिक धन से नहीं बल्कि साहस, सेवा और आत्मविश्वास से है. उनके अनुसार, यही वे निधियां हैं जो लोगों को जोड़ने और समाज में सामंजस्य स्थापित करने में मदद करती हैं.

छात्र जीवन से मिली सीख

नागर ने भारत से ब्रिटेन तक की अपनी यात्रा का ज़िक्र किया. उन्होंने बताया कि बाथ विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान उन्हें न केवल शिक्षा और अवसर मिले बल्कि एक आत्मीय समुदाय भी मिला. इंडियन नेशनल स्टूडेंट एसोसिएशन और स्थानीय भारतीय समुदाय से जुड़कर उन्होंने समझा कि संस्कृति वह धरोहर है जिसे हम अपने साथ लेकर चलते हैं और दूसरों के साथ साझा करते हैं.

कहानी कहने की शक्ति

युवा फिल्म निर्माता ने कहा कि इन्हीं अनुभवों ने उन्हें कहानी कहने की कला की ताकत का एहसास कराया. उन्होंने सिनेमा को शिक्षा और सांस्कृतिक आदान‑प्रदान का माध्यम बनाने का संकल्प लिया. मात्र 21 वर्ष की उम्र में उन्होंने ‘हनुमान अंश’ फिल्म बनाई, जो नीम करोली बाबा के जीवन और शिक्षाओं से प्रेरित है.

विश्वास और आत्मबल का महत्व

नागर ने भगवान हनुमान के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि हनुमान जी ने समुद्र इसलिए पार नहीं किया क्योंकि वे जानते थे कि वे सक्षम हैं, बल्कि इसलिए क्योंकि उन्हें अटूट विश्वास था. यही विश्वास शक्ति को अपने पीछे खींच लाता है. उनके इस संदेश ने उपस्थित लोगों को गहराई से प्रभावित किया.

शिक्षा का व्यापक अर्थ

उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा केवल कक्षाओं और किताबों तक सीमित नहीं है. असली शिक्षा संवाद, संस्कृति, सेवा और उन कहानियों से आती है जिन्हें हम दुनिया के सामने रखते हैं.

सेतु‑निर्माण का आह्वान

अपने भाषण के अंत में अनुप्रिया ने सभी से आग्रह किया कि वे अपने समुदायों में सेतु‑निर्माता बनें. उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के भीतर एक दिव्य चिंगारी है और सवाल सिर्फ इतना है कि क्या हम उसे पहचानने का साहस रखते हैं.

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सराहना और सम्मान

उनके इस प्रेरक संबोधन को हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्यों और अतिथियों ने खूब सराहा. यह आयोजन अनुप्रिया नागर के सफर में एक और गौरवशाली पड़ाव साबित हुआ और उनकी कहानी इस बात का उदाहरण बनी कि शिक्षा, संस्कृति और कहानी विधा मिलकर वैश्विक स्तर पर सकारात्मक बदलाव ला सकती है.

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-भारत एक्सप्रेस



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