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सीएम विजय को बड़ा झटका, करूर भगदड़ पीड़ितों को नौकरी देने के आदेश को HC ने किया खारिज

मद्रास हाई कोर्ट ने करूर भगदड़ (Karur Stampede) पीड़ितों को नौकरी देने के मुख्यमंत्री विजय के आदेश को रद्द कर दिया है.

मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने सोमवार को करूर भगदड़ पीड़ितों के परिवारों को नौकरी देने के मुख्यमंत्री विजय के आदेश को खारिज कर दिया. इस महीने की शुरुआत में विजय ने करूर का दौरा किया था और वहां उन्होंने पीड़ित परिवारों को सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया था. अदालत ने इस फैसले को अस्वीकार कर दिया.

करूर भगदड़ की घटना

27 सितंबर 2025 को तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) प्रमुख और अभिनेता विजय की रैली के दौरान करूर में भगदड़ मच गई थी. इस हादसे में 41 लोगों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे. घटना के बाद से ही इसकी जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग उठ रही थी.

अदालत के सख्त सवाल

सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों ने सरकार से तीखे सवाल किए. उन्होंने कहा कि रोजगार का मतलब परिवार का भरण-पोषण होता है. अगर करूर हादसे में मारे गए लोगों को नौकरी दी जा रही है, तो क्या सरकार सड़क दुर्घटनाओं या बस हादसों में मारे गए लोगों के परिवारों को भी नौकरी देगी? अदालत ने साफ किया कि इस तरह की नियुक्तियां सामान्य प्रक्रिया नहीं हैं.

CBI के हाथ में जांच

अक्टूबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच राज्य की एसआईटी से हटाकर सीबीआई को सौंप दी थी. जांच में भीड़ प्रबंधन, विजय के कार्यक्रम का टाइमलाइन और आयोजकों व स्थानीय प्रशासन के बीच तालमेल जैसे पहलुओं की पड़ताल की जा रही है.

मुख्यमंत्री का आदेश

इस महीने की शुरुआत में मुख्यमंत्री विजय ने करूर हादसे में मारे गए 32 पीड़ितों के वारिसों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने का आदेश दिया था. सरकार का कहना था कि यह कदम राहत और पुनर्वास का हिस्सा है, ताकि परिवारों को आर्थिक सहारा मिल सके.

विपक्ष का विरोध

AIADMK नेता आरबी उदयकुमार ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की थी. उन्होंने कहा था कि यह आम युवाओं के साथ धोखा है, जो वर्षों से सरकारी नौकरी पाने का इंतजार कर रहे हैं. उनका आरोप था कि नियमों को दरकिनार कर राजनीतिक कारणों से अस्थायी नियुक्तियां दी गईं.

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TNPSC प्रक्रिया पर सवाल

उदयकुमार ने जोर देकर कहा कि तमिलनाडु में सभी सरकारी भर्तियां तमिलनाडु पब्लिक सर्विस कमीशन (TNPSC) के जरिए ही होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि मुआवजे के तौर पर नौकरी देना गलत मिसाल है और इससे राज्य के युवाओं का भरोसा टूटेगा.

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-भारत एक्सप्रेस



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