राजस्थान के दूर-दराज गांवों और ढाणियों में रहने वाले लोगों के लिए अब बीमारी का मतलब जिला अस्पताल की लंबी और खर्चीली दौड़ नहीं रहा. प्रदेश में आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के नेटवर्क ने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की पूरी तस्वीर ही बदलकर रख दी है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अगुवाई में राज्य के हर कोने तक गुणवत्तापूर्ण और सुलभ इलाज पहुंचाने की यह मुहिम तेजी से रंग ला रही है.
11 हजार से ज्यादा आरोग्य मंदिर पूरी तरह एक्टिव
प्रदेश में कुल 18,436 स्वास्थ्य केंद्रों को आयुष्मान आरोग्य मंदिर के रूप में विकसित करने का लक्ष्य तय किया गया था. इनमें से लगभग 11,500 केंद्र अब पूरी तरह एक्टिव हो चुके हैं. इनमें 8,370 उप स्वास्थ्य केंद्र, 2,107 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC), 286 शहरी PHC और 728 शहरी जनता क्लिनिक शामिल हैं.
इन केंद्रों पर प्रशिक्षित कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (CHO), एएनएम, नर्स और आशा कार्यकर्ताओं की टीम हफ्ते के सातों दिन स्वास्थ्य सुविधाएं दे रही है.
121 दवाइयां और 14 जांच बिल्कुल मुफ्त
इन केंद्रों पर सिर्फ बुखार का इलाज नहीं होता, बल्कि 12 व्यापक स्वास्थ्य सेवाएं मिलती हैं. इनमें गर्भवती महिलाओं की देखभाल, बच्चों का स्वास्थ्य, डायबिटीज-बीपी की स्क्रीनिंग, आंखों-कान-दांतों की जांच और मानसिक स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं शामिल हैं.
इसके साथ ही मरीजों को 121 तरह की जरूरी दवाएं और हीमोग्लोबिन, शुगर, मलेरिया, डेंगू जैसे 14 मुफ्त जांचें घर के पास ही उपलब्ध कराई जा रही हैं.
क्या है e-संजीवनी?
आरोग्य मंदिरों की सबसे बड़ी ताकत बनी है टेलीमेडिसिन सेवा. ई-संजीवनी के जरिए local सेंटरों को मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों से जोड़ा गया है. इससे ग्रामीण सीधे विशेषज्ञ डॉक्टरों से ऑनलाइन सलाह ले पा रहे हैं. अब तक 31 लाख से ज्यादा लोग इस डिजिटल सुविधा का लाभ उठा चुके हैं.
साथ ही योग, पोषण और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए 44 लाख से ज्यादा वेलनेस सेशन आयोजित किए जा चुके हैं, जिनसे करीब 4 करोड़ लोग जागरूक हुए हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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