Bhojshala Case: मध्य प्रदेश के धार में हिंदू-मुस्लिम समुदाय के बीच सैकड़ों साल से चले आ रहे भोजशाला परिसर विवाद का निपटारा कराने में जिला प्रशासन न्यायालय के आदेश का पालन कर रहा है. उच्च न्यायालय ने भोजशाला परिसर में प्राचीन हिंदू मंदिर होने का प्रमाण देखा था, जिसके बाद हिंदू पक्ष को अपने मंदिर का एकाधिकार मिला. इससे मुस्लिम पक्ष रुष्ट हो गया और सर्वोच्च न्यायालय चला गया. जिसके बाद मुस्लिम पक्ष को नमाज के लिए वैकल्पिक जगह मुहैया कराने के लिए कहा गया.
प्रशासन ने जुमे की नमाज के लिए वैकल्पिक स्थान के रूप में भोजशाला परिसर से करीब 2 किमी दूर (चालीस-पीर परिसर) जगह खोजी. उसकी साफ-सफाई भी कराई, लेकिन मुस्लिम पक्ष वहां जाने को तैयार नहीं हुआ. अब एक बार फिर जुमे की नमाज के लिए वैकल्पिक स्थान तय करने की कवायद तेज हो गई है. मुस्लिम समाज की ओर से ख्वालिया पीर के समीप प्रस्तावित स्थान पर आपत्ति जताने के बाद जिला प्रशासन ने सोमवार को डिस्ट्रिक्ट रोड स्थित नए प्रस्तावित वैकल्पिक विकल्पों का निरीक्षण किया.
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‘सर्वोच्च न्यायालय में 29 जुलाई को सुनवाई’
खबरों के अनुसार, सदर नंबर 509 और 639 की जमीनों को संभावित विकल्प के रूप में देखा गया है. जानकारों का कहना है कि प्रशासन इन दोनों स्थानों में से किसी एक को अंतिम रूप दे सकता है. यह दोनों स्थान भोजशाला परिसर से लगभग 500 मीटर दूर हैं. माना जा रहा है कि कोर्ट के निर्देशों के बाद ही जुमे की नमाज के लिए अंतिम स्थान तय होगा. इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय 29 जुलाई को सुनवाई करेगा.
‘मुस्लिमों को नए स्थानों की जानकारी नहीं’
कमाल मौलाना सोसायटी, सदर अब्दुल समद ने कहा, “प्रशासन द्वारा चिन्हित नए स्थानों की जानकारी समाज को नहीं है. सर्वोच्च न्यायालय हमारी याचिका लंबित है. ”
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